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Mission Gaganyaan: 21 अक्तूबर को टीवी-डी1 भरेगा पहली परीक्षण उड़ान, श्रीहरिकोटा से किया जाएगा प्रक्षेपित

Mon, 16 Oct 2023 03:53 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीहरिकोटा

सार

कार्यक्रम से जुड़े जानकारों के मुताबिक, पहले परीक्षण उड़ान के नतीजों के आधार पर अन्य परीक्षण किए जाएंगे। इस दौरान क्रू मॉड्यूल को परखा जाएगा। जिसमें क्रू एस्केप प्रणाली भी शामिल है। 
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गगनयान मिशन के तहत टीवी-डी1 - फोटो : ISRO
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विस्तार
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इसरो ने अपने गगनयान मिशन को लेकर लगभग तैयारियां पूरी कर ली है। सोशल मीडिया साइट के जरिए कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें और जानकारी साझा की। जिसमें कहा गया कि गगनयान मिशन के तहत टीवी-डी1 अपने पहली परीक्षण के लिए 21 अक्तूबर को उड़ान भरेगा। जिसे सुबह 7 से 9 बजे के बीच श्रीहरिकोटा से भेजा जाएगा। हालांकि इस परीक्षण के बाद भी तीन और परीक्षण वाहन मिशन आयोजित होंगे।
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कार्यक्रम से जुड़े जानकारों के मुताबिक, पहले परीक्षण उड़ान के नतीजों के आधार पर अन्य परीक्षण किए जाएंगे। इस दौरान क्रू मॉड्यूल को परखा जाएगा। जिसमें क्रू एस्केप प्रणाली भी शामिल है। बात दें कि गगनयान का यह हिस्सा तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाने में इस्तेमाल किया जाएगा।

वापसी में बंगाल की खाड़ी में उतारा जाएगा मॉड्यूल
यह परीक्षण श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा। इसमें क्रू मॉड्यूल की उड़ान, उसे वापस उतारने और समुद्र से रिकवर करने की प्रक्रियाएं शामिल होंगी। मॉड्यूल को वापसी में बंगाल की खाड़ी में उतारा जाना है। जिसे भारतीय नौसेना द्वारा रिकवर किया जाएगा। इसके के लिए नौसैनिकों का एक गोताखोर दल बनाया गया है। साथ ही मिशन के लिए एक जहाज को भी तैयार किया जाएगा। चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग और सूर्य के लिए आदित्य-एल1 के सफल प्रक्षेपण के बाद गगनयान मिशन भारत को खगोल विज्ञान पर काम कर रहे अग्रणी देशों में शामिल करेगा।
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क्रू-एस्केप से बचेगा जीवन
इसरो के मुताबिक, फ्लाइट टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन1 की तैयारियां जारी हैं। मिशन में किसी अनहोनी की दशा में अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने में यह क्रू-एस्केप प्रणाली काम आएगी। उड़ान भरते समय अगर मिशन में गड़बड़ी हुई तो यह प्रणाली क्रू मॉड्यूल के साथ यान से अलग हो जाएगा, कुछ समय उड़ेगा और श्रीहरिकोटा से 10 किमी दूर समुद्र में उतरेगी। इसमें मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को नौसेना की ओर से समुद्र से सुरक्षित वापस लाया जाएगा।

अगले साल भेजा जा सकता है गगनयान
गगनयान भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन है, इसे अगले साल के आखिर या 2025 की शुरुआत तक भेजा जा सकता है। 2024 में मानव रहित परीक्षण उड़ान होगी, जिसमें एक व्योममित्र रोबोट भेजा जाएगा।
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