राहुल गांधी ने दिया संदेश, पार्टी और उसके महत्व को समझें नेता
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पंजाब के तमाम नेताओं से मुलाकात की। अभी यह सिलसिला लगातार चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, वित्त मंत्री मनप्रीत बादल से भी राहुल ने चर्चा की है। सुखविंदर सिंह सरकारिया, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, परगट सिंग, संगत सिंग गिलजियां, रजिया सुल्ताना, सुखजिंदर सिंह रंधावा, कुशल दीप ढिल्लो, सांसद अमर सिंह समेत अन्य ने राहुल से भेंट और चर्चा की। रवनीत सिंह बिट्टू से भी मंत्रणा की। इस भेंट मुलाकात की चर्चा के दौरान राहुल गांधी कुछ नाराज भी हुए। उन्होंने पार्टी के नेताओं को इसके फोरम और महत्व को समझने, याद रखने की भी नसीहत दी। प्रताप सिंह बाजवा राहुल गांधी के प्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। राहुल गांधी ने पंजाब के नेताओं से एक बार फिर अपील की कि वह निजी हित और आपसी मतभेद के बजाय पार्टी के हित में काम करें। वैसे भी पंजाब विधानसभा चुनाव 2023 में प्रस्तावित हैं। इसमें एक साल का समय बचा है। यह समय तैयारियों और जनता के बीच में विश्वास बढ़ाने का है।
कैप्टन को झुकना मंजूर नहीं
पंजाब में लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, गुरुदासपुर, होशियारपुर हर जगह नेताओं से चर्चा कीजिए तो दो ही बातें सुनने को मिल रही हैं। पहली यह कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह बिना किसी तरह की कमजोरी जाहिर किए सिद्धू या नाराज नेताओं को समायोजित करने के पक्ष में हैं। कैप्टन समर्थक धड़ा चाहता है कि 2023 का विधानसभा चुनाव कैप्टन के नेतृत्व में लड़ा जाए। यह सवाल राहुल गांधी मिलने वालों से भी उठाते हैं। वह साफ पूछते हैं कि 2017 के चुनाव में आप लोगों ने ही कैप्टन को चेहरा बनाने की वकालत की थी और अब विरोध कर रहे हैं? कांग्रेस हाईकमान द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने भी आगामी विधानसभा चुनाव कैप्टन के नेतृत्व में ही लड़ने की सिफारिश की है।
दूसरी चर्चा यह है कि नवजोत सिंह सिद्धू को यदि कांग्रेस नहीं संभाल पाई, तो वह आम आदमी पार्टी में जा सकते हैं। हालांकि तीन सदस्यीय समिति ने जितनी जरूरत कैप्टन की बताई है, उतना ही महत्व पार्टी के लिए सिद्धू को भी दिया है। सिद्धू चाहते हैं कि उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी दे दी जाए। राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री बना दिया जाए। कैप्टन और उनके खेमे को यह दोनों ही स्थितियां मंजूर नहीं है। कैप्टन का मानना है कि उपमुख्यमंत्री जैसी कोई चीज नहीं होती। गृह, वित्त जैसे विभाग छोड़कर वह सिद्धू को किसी भी विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाने को तैयार हैं। सिद्धू के करीबी दो-तीन चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने में भी आपत्ति नहीं है। इसी नाक की लड़ाई़ में पंजाब की कांग्रेसी लड़ाई उलझी है।
पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी के हित में सबको झुकना पड़ेगा। थोड़ा कैप्टन अमरिंदर सिंह को स्थितियों को समझना पड़ेगा और थोड़ा नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी के हित को ध्यान में रखना होगा। परगट सिंह, बाजवा, सुनील जाखड़ को भी कांग्रेस के पार्टी के हितों को अहमियत देनी पड़ेगी। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि समस्या पेचीदा है, लेकिन बहुत मुश्किल भी नहीं है। जल्द सुलझा ली जाएगी।