'कुछ लोग इतिहास अपने हिसाब से लिखने की कोशिश कर रहे हैं'
उन्होंने कहा कि कुछ लोग इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और इसे अपने हिसाब से लिख रहे हैं। लेकिन हमें असली इतिहास को सामने लाना होगा और समाज में नफरत और विभाजन के खिलाफ आवाज उठानी होगी। तुषार गांधी ने कहा कि हमने हिंसा, नफरत और विभाजन की संस्कृति अपना ली है। हम धर्म, जाति व क्षेत्र के आधार पर बंटे हुए हैं। हमारा विभाजन हमारी पहचान और मानसिकता है और सामाजिक व्यवस्था इसी पर आधारित है।
'देश कोई नक्शा या ध्वज नहीं है, देश का निर्माण लोगों से होता है'
गांधी ने कहा कि एक देश केवल एक सीमा, एक ध्वज या फिर एक नक्शा भर नहीं है। एक देश ऐसी भूमि है जहां लोग रहते हैं। लोगों से देश बनता है। उन्होंने कहा कि जब महात्मा गांधी ने डांडी यात्रा निकालने का प्रस्ताव दिया था तब अधिकतर कांग्रेस नेताओं ने उनके इस विचार का विरोध किया था। उन्हें इस बात पर संदेह था कि यह योजना असफल हो जाएगी और उन्हें यह भी लगा था कि इससे पार्टी को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है।
डांडी यात्रा को संदेह के बाद भी आजादी के लिए आंदोलन में बदला
उन्होंने कहा, लेकिन महात्मा गांधी ने उनकी शंकाओं के उत्तर में केवल एक पंक्ति लिखी थी... 'कर के देखो'। उन्होंने यह दिखाया कि डांडी यात्रा स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए एक आंदोलन में बदल सकता है। हमें आज भी नफरत, विभाजन और असमानता की स्थिति के खिलाफ वही करने की जरूरत है ,'कर के देखो'। अगर हमें महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो हमें उनकी शिक्षाओं को अपनाना होगा और उनकी विचारधारा का अनुपालन करना होगा।