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महात्मा गांधी की पुण्य तिथि: तुषार गांधी बोले, गोडसे की विचारधारा हावी हो रही है, 'नफरत का जहर' फैल रहा है

Sun, 30 Jan 2022 10:15 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालना

सार

तुषार गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके बताए रास्ते पर चलना और उनकी विचारधारा को अपनाना है।
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि पर रविवार को उनके प्रपौत्र तुषार गांधी ने कहा कि देश में बापू की विचारधारा पर चलने वाले लोगों की संख्या कम होती जा रही है। जबकि, उनकी हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे की विचारधारा तेजी से हावी हो रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार स्वतंत्रता के 75वे वर्ष का जश्न मनाने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव आयोजित कर रही है लेकिन, देखा गया है कि समाज में नफरत का जहर फैल रहा है।

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तुषार गांधी ने यह बात महाराष्ट्र के जालना में स्थित जेईएस कॉलेज के गांधी अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम 'कर के देखो' के दौरान कही। वर्चुअल माध्यम से हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, महात्मा गांधी की शिक्षाएं क्षीण होती जा रही हैं और उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे की विचारधारा उस पर हावी हो रही है। केंद्र सरकार आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है लेकिन अमृत अब जहर बन गया है और देश में बहुत तेजी के साथ बढ़ रहा है।

'कुछ लोग इतिहास अपने हिसाब से लिखने की कोशिश कर रहे हैं'
उन्होंने कहा कि कुछ लोग इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और इसे अपने हिसाब से लिख रहे हैं। लेकिन हमें असली इतिहास को सामने लाना होगा और समाज में नफरत और विभाजन के खिलाफ आवाज उठानी होगी। तुषार गांधी ने कहा कि हमने हिंसा, नफरत और विभाजन की संस्कृति अपना ली है। हम धर्म, जाति व क्षेत्र के आधार पर बंटे हुए हैं। हमारा विभाजन हमारी पहचान और मानसिकता है और सामाजिक व्यवस्था इसी पर आधारित है। 

'देश कोई नक्शा या ध्वज नहीं है, देश का निर्माण लोगों से होता है'
गांधी ने कहा कि एक देश केवल एक सीमा, एक ध्वज या फिर एक नक्शा भर नहीं है। एक देश ऐसी भूमि है जहां लोग रहते हैं। लोगों से देश बनता है। उन्होंने कहा कि जब महात्मा गांधी ने डांडी यात्रा निकालने का प्रस्ताव दिया था तब अधिकतर कांग्रेस नेताओं ने उनके इस विचार का विरोध किया था। उन्हें इस बात पर संदेह था कि यह योजना असफल हो जाएगी और उन्हें यह भी लगा था कि इससे पार्टी को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है।
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डांडी यात्रा को संदेह के बाद भी आजादी के लिए आंदोलन में बदला
उन्होंने कहा, लेकिन महात्मा गांधी ने उनकी शंकाओं के उत्तर में केवल एक पंक्ति लिखी थी... 'कर के देखो'। उन्होंने यह दिखाया कि डांडी यात्रा स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए एक आंदोलन में बदल सकता है। हमें आज भी नफरत, विभाजन और असमानता की स्थिति के खिलाफ वही करने की जरूरत है ,'कर के देखो'। अगर हमें महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो हमें उनकी शिक्षाओं को अपनाना होगा और उनकी विचारधारा का अनुपालन करना होगा।
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