Tu ya Main and Madhumalika: लोकार्पण समारोह में मौजूद साहित्य बिरादरी को संबोधित करते हुए चंद्रिका जोशी ने बताया कि मधुमालिका में कविवर सुमित्रानंदन पंत की की ही लेखनी में उनकी एक अप्रकाशित रचना को पाठकों के सामने प्रस्तुत किया गया है।
उत्तराखंड के चर्चित कवि जीवन चंद्र पंत की 70 वर्ष से अप्रकाशित पुस्तक का आज लोकार्पण किया गया। इसके अलावा गगन पंत के उपन्यास तू या मैं का भी विमोचन इसी अवसर पर हुआ। दोनों ही पुस्तकें हंस प्रकाशन ने छापी हैं। मधुमालिका में कविताओं का संकलन आकाशवाणी की मशहूर समाचार वाचिका चंद्रिका जोशी ने किया है। उन्होंने अपने पिता के सात दशक के रचनाकाल की विरासत को इस पुस्तक में संग्रहित किया है।
विज्ञापन
लोकार्पण समारोह में मौजूद साहित्य बिरादरी को संबोधित करते हुए चंद्रिका जोशी ने बताया कि मधुमालिका में कविवर सुमित्रानंदन पंत की की ही लेखनी में उनकी एक अप्रकाशित रचना को पाठकों के सामने प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह दादी नानी के हाथ के व्यंजन की सुगंध और स्वाद भोजन में अलग प्रभाव पैदा करते हैं, उसी तरह यह संकलन भी पाठकों के अंतर्मन और मस्तिष्क पर अपनी अलग छाप छोड़ेगा।
हिंदी, संस्कृत ओर गढ़वाली के कवि जीत राम भट ने कहा कि चंद्रिका ने जिस तरह अपनी पिता की थाथी को सहेज कर मधुमालिका के रूप में संजोया है वह अपने परिवार, समाज और उत्तराखंड के लिए कृतज्ञता ज्ञापन है। इससे दूसरों को भी अपने परिवारजनों का आभार उतारने की प्रेरिणा मिलेगी।
विज्ञापन
समारोह के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध कहानीकार महेश दर्पण ने कहा कि जीवन चंद्र पंत का पूरा साहित्य इस बात की गवाही है कि उन्होंने वही लिखा जो लिखने योग्य था। साहित्य में सबसे अहम यही है कि वह न लिखा जाए जिसे लिखा नहीं जाना चाहिए। लोकार्पण कार्यक्रम में प्रेेस क्लब आफ इंडिया के उमाकांत लखेड़ा भी मौजूद थे।