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सबरीमाला संघर्ष: धार्मिक भावनाएं भड़का लड़ाई भाजपा बनाम माकपा बनाने की कोशिश

Fri, 04 Jan 2019 12:46 AM IST
संदीप भट्ट शरद गुप्ता, नई दिल्ली
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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर छिड़े विवाद के पीछे केरल की सत्तारूढ़ माकपा की राजनीति है। केरल की यूडीएफ बनाम एलडीएफ की राजनीति में यह माकपा की कांग्रेस को दरकिनार करने की कोशिश है। राजस्थान की तरह केरल में भी हर पांच साल में सरकार बदल जाती है। 
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1957 के पहले विधानसभा चुनाव से ही राज्य में बारी-बारी से कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और माकपा के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार बनाते हैं। ढाई साल पहले ही यूडीएफ नेता ओमन चांडी को हराकर एलडीएफ के पिनराई विजयन मुख्यमंत्री बने हैं। राज्य की आबादी का 54 प्रतिशत हिस्सा हिंदू है, जबकि मुसलमान 18 प्रतिशत और ईसाई 27 प्रतिशत हैं। 

कांग्रेस और माकपा का वोट बैंक लगभग एक ही है। सबरीमाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य की राजनीति माकपा बनाम भाजपा हो गई है। माकपा का मानना है कि इस मुद्दे पर मुसलमान और ईसाई उसके साथ हैं ही, यदि हिंदुओं के एक हिस्सा का वोट भी उसे मिला तो वह केरल में अजेय हो जाएगी।
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भाजपा और हिंदू संगठन मंदिर महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ हैं। बुधवार को राज्य सरकार ने पुलिस के पहरे में दो महिलाओं को दर्शन कराकर हिंदू संगठनों को भड़का दिया। इसका जितना ज्यादा विरोध होगा उतना ही राजनीतिक लाभ मिलने की माकपा को आशा है। हालांकि, माकपा सांसद मोहम्मद सलीम इस मसले पर राजनीति करने से इनकार करते हुए कहा कि हमारी सरकार तो केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू कर रही है। 

एलडीएफ के ही एक पूर्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन जानबूझकर सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत कर रहे हैं। 140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा में भाजपा का सिर्फ एक विधायक है। लेकिन चार महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा की उम्मीदें बढ़ गई हैं।  
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