फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'योगी आदित्यनाथ को खास इमेज में कैद रखने की कोशिश'

Thu, 30 Mar 2017 03:16 PM IST
मधु किश्वर प्रोफ़ेसर और लेखिका / बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में मीडिया में इतनी बातें होने से एक फायदा यह हुआ कि पत्रकार गोरखपुर जाकर यह देखने लगे कि वाकई में गोरक्षनाथ राक्षसों का अड्डा है क्या? और, जो उन लोगों ने उनके बारे में पाया है, वो एकदम उलट है। योगी आदित्यनाथ को इतना मुस्लिम विरोधी दिखाया जा रहा है कि उनके दूसरे कामों को लोग देख ही नहीं रहे हैं।
विज्ञापन


सालों से उनके यहां लगने वाले जनता दरबार में हर जाति और धर्म के लोग अपनी समस्या लेकर आते हैं। और जायज शिकायत होने पर बिना किसी भेदभाव के वो उस पर सुनवाई करते हैं। निजी तौर पर उनके मुसलमानों के साथ अच्छे रिश्ते हैं।


वो खुद भी एक बात कहते रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में हर कहीं दंगे हुए हैं लेकिन गोरखपुर में नहीं हुए हैं। अवैध बूचड़खाने बंद करने के फैसले की ही सिर्फ चारों तरफ चर्चा हो रही है, जैसे कोई दूसरा काम वो कर ही नहीं रहे हैं। ये बूचड़खाने भी अपनी मनमर्जी से नहीं बंद किए जा रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर ये फैसला लिया गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

चीज की शुरुआत सरकारी दफ्तरों से 

जहां तक उनके दूसरे आदेशों की बात है, तो उन्होंने अपने मंत्रियों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा 15 दिनों के अंदर लिखित में देने को कहा है। उन्होंने एक तरह से अपने मंत्रियों और अफसरों पर नकेल कसी है। इसके अलावा जो एक अहम कदम उन्होंने उठाया है, वो है सरकारी दफ्तरों में पान मसाला पर रोक लगाना। इसकी भी कोई चर्चा नहीं कर रहा है। अच्छी बात है कि वो हर चीज की शुरुआत सरकारी दफ्तरों से कर रहे हैं।


अधूरे विकास कार्य जिन पर हजारों करोड़ खर्च हुए हैं, उनकी भी वो समीक्षा कर रहे हैं। 24 घंटे बिजली देने का उनका वादा भी कोई छोटी-मोटा वादा नहीं है। उत्तर प्रदेश में उद्योग-धंधे का विकास बिजली की कमी की वजह से आज तक नहीं हो पाया है। उन्होंने ऑनलाइन भर्ती जैसे अहम कदम उठान की भी बात कही है ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सके।

उन्होंने विश्वविद्यालय खोलने के बात कही है और इस बाबत बात होनी चाहिए ताकि ये पता चले कि ये कैसे हो पाएगा। लेकिन इतने अहम फैसलों के बावजूद क्यों सिर्फ एंटी रोमियो स्कवायड की ही बात की जा रही है? इस फैसले से उत्तर प्रदेश की महिलाएं खुश हैं। इससे सिर्फ दिल्ली में बैठे कुछ बुद्धिजीवी, धर्मनिरपेक्ष और वामपंथियों के पेट में ही दर्द हो रहा है।

(बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित)

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें