अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से भेदभाव के मुद्दे पर विपक्ष ने शुक्रवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा किया। सपा, कांग्रेस और वामपंथी दलों के सदस्यों ने वेल में आकर नारे लगाए। उप सभापति पी जे कुरियन की शांति की अपील बेअसर रही। बाद में उन्होंने सदन स्थगित कर दिया।
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मामला अदालत में है और भेदभाव के आरोप पूरी तरह गलत हैं। शून्यकाल में सपा के जावेद अली ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के बयान के आधार पर यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि वाइस चांसलर ने कहा है कि मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी एएमयू के नए कैंपस सेंटर को गैरकानूनी बताकर फंड रोकने की चेतावनी दी है।
केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार के इन केंद्रों को केंद्र सरकार, राष्ट्रपति और कार्यकारी परिषद से मंजूरी मिली थी। राष्ट्रपति विवि के विजिटर हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से उत्तर मांगा।
उपसभापति ने नियमों का हवाला देते कहा कि शून्यकाल में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराई जा सकती। अगर इस पर चर्चा करानी है तो उसके लिए अलग से नोटिस देना होगा। इसके बाद भी सपा सदस्य शांत नहीं हुए।
सपा के राम गोपाल यादव समेत तमाम सदस्यों ने अपने स्थान पर खड़े होकर विरोध जताया। बाद में सपा सदस्य वेल में आ गए। इसके बाद कांग्रेस सदस्य भी वेल में आकर नारे लगाने लगे।
माकपा के सीताराम येचुरी ने मंत्री के बयान को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के शपथ पत्र को वापस लेकर एनडीए सरकार ने नया शपथ पत्र अदालत में दिया है। इससे विवाद खड़ा हुआ है। सरकार को नया शपथ पत्र वापस लेना चाहिए। नकवी ने कहा कि मामला कोर्ट में है।
अलीगढ़ मुस्लिम विवि अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त केंद्रीय विश्वविद्यालय है और इस विवि का सम्मान कायम रहेगा। कांग्रेस के आनन्द शर्मा ने भी सरकार से नया शपथ पत्र वापस लेने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने भी इसका समर्थन किया। जदयू के शरद यादव ने कहा कि सरकार के शपथ पत्र से समस्या खड़ी हुई है। उन्होंने अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।