त्रिपुरा के स्वास्थ्य मंत्री सुदीप रॉय बर्मन को शुक्रवार को राज्य की कैबिनेट से निकाल दिया गया है। उनपर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और उनके डिप्टी जिष्णु देव वर्मा अब इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग (गोपनीय और मंत्रिमंडल) द्वारा जारी और मुख्य सचिव (प्रभारी) कुमार आलोक के हस्ताक्षर वाली अधिसूचना में लिखा है, 'त्रिपुरा के राज्यपाल ने मुख्यमंत्री की सलाह पर श्री सुदीप रॉय बर्मन द्वारा संभाले जाने वाले मंत्रालय को मुख्यमंत्री को आवंटित कर दिया गया है। श्री सुदीप रॉय बर्मन अब मंत्रिपरिषद के सदस्य नहीं हैं।'
23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा था कि राज्य में उन्हें कई षड्यंत्रों के बावजूद जीत मिली है। उन्होंने कहा था कि भाजपा के अंदर मौजूद शत्रुओं के षड्यंत्रों को विफल किया गया है। देब ने कहा था, 'हमारे अपने लोगों ने हमारे खिलाफ षड्यंत्र रचा। उनका नाम लेने की जरुरत नहीं है। उनके नाम अपने आप सामने आ जाएंगे। पार्टी ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।'
बर्मन जिन्हें अक्सर मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में देखा जाता है वह पांच बार के विधायक हैं और पूर्व में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। कांग्रेस का नेतृत्व करने के बाद उन्होंने 2016 में पार्टी छोड़ दी थी और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद वह राज्य में भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन की सरकार बनने से कुछ महीनों पहले भाजपा में शामिल हो गए थे।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बर्मन का भाजपा में शामिल होना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण था। 2017 में उन्होंने पांच अन्य विधायकों के साथ भाजपा का दामन थामा था। उनके कारण भाजपा को सत्ता पर काबिज होने में मदद मिली थी। लोकसभा चुनाव से एक दिन पहले बर्मन ने सरकारी अस्पताल के एक डॉक्टर को रंगे हाथ गर्भपात करते हुए पकड़ा था।