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त्रिपुरा के सीएम का इस्तीफा : नया नहीं है चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदलने का ट्रेंड, जानें इससे कितना होता है फायदा-नुकसान

Sat, 14 May 2022 06:47 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऐसा नहीं है कि ये कोई नया चलन है। भाजपा में ऐसे कई उदाहरण पहले भी रहे हैं। हाल ही में उत्तराखंड, गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों में चुनाव से छह महीने से डेढ़ साल पहले तक मुख्यमंत्री को बदला गया है।
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त्रिपुरा में मुख्यमंत्री का इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से बात करने के बाद उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अब शाम को विधायक दल की बैठक में नया नेता चुना जाएगा। राज्य में अगले साल फरवरी मार्च में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे तय हो गया है कि चुनाव से पहले एक और राज्य में भाजपा मुख्यमंत्री का चेहरा बदलेगी।
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ऐसा नहीं है कि ये कोई नया चलन है। भाजपा में ऐसे कई उदाहरण पहले भी रहे हैं। हाल ही में उत्तराखंड, गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों में चुनाव से छह महीने से डेढ़ साल पहले तक मुख्यमंत्री को बदला गया है। आइए जानते हैं कब-कब और कहां-कहां चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदले गए और उसके क्या परिणाम देखने को मिले? 
 

गुजरात : जब केशुभाई को हटाकर मोदी को दे दी गई कमान

गुजरात में भाजपा ने बदले इतने मुख्यमंत्री। - फोटो : अमर उजाला
गुजरात में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। चुनाव से 15 महीने पहले यानी सितंबर 2021 में ही विजय रूपाणी को हटाकर भूपेंद्र पटेल को  मुख्यमंत्री बना दिया गया। अब भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में पार्टी गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। गुजरात में चुनाव से 15 महीने पहले मुख्यमंत्री बनने वाले पटेल तीसरे नेता हैं। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव से 15 महीने पहले आनंदीबेन पटेल की जगह विजय भाई रूपाणी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया। विजयभाई रूपाणी तब गुजरात भाजपा के अध्यक्ष हुआ करते थे। विजय भाई रूपाणी के नेतृत्व में भाजपा ने 2017 का चुनाव लड़ा और फिर जीत हासिल की। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जब पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तब राज्य में चुनाव होने में 15 महीने  बचे थे। 2002 में यहां विधानसभा चुनाव होने थे। राज्य में भाजपा की सरकार थी। मुख्यमंत्री थे केशुभाई पटेल। चुनाव से 15 महीने पहले केशुभाई पटेल से पार्टी ने इस्तीफा ले लिया। नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने। मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।   
 

उत्तराखंड :  पांच साल में तीन मुख्यमंत्री

उत्तराखंड में भाजपा के मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला
हाल ही उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव हुए। भाजपा ने चुनाव जीता। इससे पहले पार्टी ने चार महीने के भीतर दो मुख्यमंत्री बदले। चुनाव से एक साल पहले यानी 10 मार्च 2021 को उन्हें त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर लोकसभा सदस्य तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बना दिया गया। जुलाई में मुख्यमंत्री बनाए जाने के चार महीने बाद ही तीरथ सिंह रावत को भी हटा दिया गया और दो बार के विधायक पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई। धामी की अगुवाई में ही पार्टी ने 2022 का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। हालांकि, धामी खुद की सीट पर चुनाव जरूर हार गए। अब वह उप-चुनाव लड़ रहे हैं। 
 

कर्नाटक : चुनाव से दो साल पहले बदल दिया सीएम

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई। - फोटो : अमर उजाला
कर्नाटक में भी भाजपा ने चुनाव से करीब 21 महीने पहले मुख्यमंत्री बदला। राज्य में अगले साल मई से पहले चुनाव होने हैं। इससे पहले पिछले साल जुलाई में पार्टी ने येदियुरप्पा को हटाकर बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बना दिया। 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के आंकड़ों से दूर थी। भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में चुनाव लड़ा और 140 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की। हालांकि, तब जनता दल सेक्युलर और कांग्रेस ने मिलकर गठबंधन की सरकार बना ली। ये सरकार ज्यादा दिन तक नहीं चली। कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के कई विधायक भाजपा में शामिल हो गए। बीएस येदियुरप्पा 2019 में मुख्यमंत्री बन गए।  
 

जब दिल्ली की कमान सुषमा स्वराज को सौंप दी

सुषमा स्वराज- नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
ये बात है 1998 की है। दिल्ली में चुनाव होने थे। 52 दिन बचे थे और उस वक्त दिल्ली में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भाजपा के साहिब सिंह वर्मा बैठे थे। बताया जाता है कि उन दिनों दिल्ली सरकार के खिलाफ जनता में काफी रोष था। खूब आंदोलन चल रहे थे। प्याज की महंगाई से जनता त्रस्त थी। साहिब सिंह वर्मा ये हालात संभाल नहीं पा रहे थे और भाजपा ने 1998 चुनाव को देखते हुए उन्हें हटा दिया। उनकी जगह दिल्ली की कमान सुषमा स्वराज को सौंप दी। हालांकि, सुषमा का भी यहां जादू नहीं चल पाया और 1998 का चुनाव कांग्रेस से भाजपा बुरी तरह हार गई। 

असम में चुनाव बाद बदला मुख्यमंत्री 
2016 में पहली बार भाजपा असम में सरकार बनाने में कामयाबी हुई थी। तब पार्टी ने सर्बानंद सोनेवाल को मुख्यमंत्री बनाया था। सर्बानंद की अगुवाई में ही पार्टी ने 2021 का भी चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत के साथ दोबारा सत्ता में लौटी। चुनाव जीत के बाद पार्टी ने मुख्यमंत्री बदल दिया। सर्बानंद को केंद्र में राज्यमंत्री का पद दिया गया और उनकी जगह असम की कमान 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन करने वाले हिमन्त विश्व सरमा को सौंप दी। 
 
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भाजपा ही नहीं, कांग्रेस में भी रहा है चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदले ने का चलन

कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
ऐसा नहीं है कि चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री बदलने का खेल केवल भाजपा में ही हुआ है। कांग्रेस में भी ऐसी ही परपाटी रही है। हाल ही में पंजाब चुनाव इसका ताजा उदाहरण है। यहां कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनाव से ठीक छह महीने पहले हटाकर दलित वर्ग से आने वाले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था। हालांकि, कांग्रेस यह चुनाव हार गई। आजादी के बाद से ही कांग्रेस में भी इस तरह के कई उदाहरण हैं जिसमें चुनाव से पहले मुख्यमंत्री को बदल दिया गया।
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