त्रिपुरा में हुए नगर निकाय चुनावों में सत्ताधारी भाजपा ने 51 सदस्यों वाले अगरतला नगर निगम (एएमसी) की सभी सीटों और अन्य कई शहरी नगर निकायों में जीत हासिल की है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया है। टीएमसी और माकपा दोनों का ही खाता नहीं खुला लेकिन टीएमसी ने अपना प्रदर्शन असाधारण बताते हुए इन परिणामों को 2023 के विधानसभा चुनावों में अपना आधार तैयार करने वाला बताया है।
त्रिपुरा के नगर निकाय चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी ने कई वार्ड में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को पीछे छोड़ दिया है। भाजपा के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरती नजर आ रही पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी ने त्रिपुरा निकाय चुनाव परिणामों को लेकर असाधारण सफलता बताया। पार्टी ने कहा कि राज्य की राजनीति में नए होने के बावजूद जैसे परिणाम हमें मिले हैं वो साल 2023 में यहां होने वाले विधानसभा चुनावों में हमारी संभावनाओं के संकेत हैं।
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टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ट्विटर पर लिखा कि यह हमारी पार्टी के लिए असाधारण था। हमारी त्रिपुरा में मौजूदगी नगण्य थी लेकिन हमने 20 फीसदी वोट शेयर हासिल किया है। उन्होंने लिखा, 'हमने मुश्किल से तीन महीने पहले यहां अपनी गतिविधियां शुरू की थीं और त्रिपुरा भाजपा ने राज्य में लोकतंत्र को कुचलने की लगातार कोशिशें की हैं। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस त्रिपुरा के सभी बहादुर कार्यकर्ताओं को उनके उदाहरणीय साहस के लिए बधाइयां।'
वहीं, बंगाल में टीएमसी के महासचिव और प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि केवल दो महीने त्रिपुरा पहुंचने वाली हमारी पार्टी ने दूसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तह है जब सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से यहां हिंसा भी की गई थी। घोष ने एक ट्वीट में लिखा कि ये परिणाम साल 2023 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत का आधार बनाएंगे। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को उनकी कोशिशों और समर्थन देने के लिए त्रिपुरा की जनता को धन्यवाद कहा।