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जानिए कब पहली बार और कैसे कोर्ट पहुंचा तीन तलाक का मामला?

Tue, 22 Aug 2017 12:56 PM IST
amarujala.com- Presented by: अभिषेक मिश्रा
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तीन तलाक को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है। वहीं तीन तलाक पर रोक लगाते हुए मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा कि ये काम सरकार और संसद का है, सरकार 6 महीने के अंदर तीन तलाक को लेकर कानून बनाए। आइए आपको बताते हैं कि कैसे और कब कोर्ट पहुंचा तीन तलाक का मामला। 
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अक्तूबर 16, 2015
एक केस की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने एक बेंच के गठन का आदेश दिया, जिसे यह जांचना था कि क्या मुस्लिम महिलाओं को तलाक के मामले में लिंग भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश हिंदू उत्तराधिकार के एक मामले की सुनावाई के दौरान दिया था। 

फरवरी  5, 2016
सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से तीन तलक, निकाह हलाला और कई पत्नियां रखने के अधिकार के मामलों में संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मदद करने को कहा। 
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पढ़ें: ये हैं वो वजहें जिनके चलते तीन तलाक देते हैं मुस्लिम

जून 29, 2016
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुसलमानों के बीच तीन तलाक के मामलों को "संवैधानिक ढांचे का कसौटी" पर जांचा जाए।

अक्तूबर 7, 2016
भारत के इतिहास में पहली बार केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसका विरोध किया और लैंगिक समानता व धर्मनिरपेक्षता के आधार पर तीन तलाक के मुद्दे पर पुनर्विचार करने का समर्थन किया।

दिसंबर  9, 2016
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक फैसले में, तीन तलाक को मुस्लिम कानून के तहत असंवैधानिक बताया। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत कानून संविधान से ऊपर नहीं हो सकता है। 

फरवरी 14, 2017
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक के सभी याचिकाओं को मुख्य मामले से जोड़ने की अनुमित दी। 

फरवरी 16, 2017
सुप्रीम कोर्ट पांच न्यायाधीशों की एक संविधान पीठ के गठन का निर्देश दिया। जो 'ट्रिपल तलक', 'निकला हलला' और कई पत्नी रखने के मामलों  पर विचार करे और फैसला सुनाएगी।

मार्च 27, 2017
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के कहा इन याचिकाओं को पोषित नहीं किया जा सकता क्योंकि ये सभी मामले न्यायपालिका के क्षेत्र से बाहर हैं। 

मार्च 30, 2017
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूकि यह मुद्दा बहुत की आवश्यक है और लोगों की भावना से जुड़ा हुआ है इसलिए बेंच 11 मई से इस मुद्दे पर सुनवाई करेगी। 

अप्रैल 11, 2017
केंद्र सरकार ने सुप्रीम से कहा कि तीन तलाक, हलाला जैसे मुद्दे मुस्लिम महिलाओं की समाजिक छवि और अधिकारों को नुकसान पहुंचाता है। 

अप्रैल 14, 2017
बसपा प्रमुख मायावती ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि तीन तलाक के मुद्दे को हल करना चाहिए। जिससे मुस्लिम महिलाओं के संवैधानिक अधिकार की रक्षा हो सके। 

अप्रैल 16, 2017
तीन तलाक के मुद्दे पर पीएम मोदी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को न्याया जरूर मिलेगा। वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि वह तीन तलाक पर नियम बनाएगा और बिना शरीयत के तलाक देने वालों के बहिष्कार की बात कही। 

अप्रैल 17, 2017
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो राजनेता तीन तलाक के मामले पर चुप है। वह उतने ही दोषी हैं जितना तीन तलाक देने वाले। उन्होंने इस मामले को महाभारत के दौरान द्रौपदी चीरहरण के जैसा बताया। 

अप्रैल 18, 2017
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि तीन तलाक को सही नहीं कहा जा सकता। क्योंकि महिलाओं को भी उतना ही अधिकार है जितना पुरुषों को। 

अप्रैल 21, 2017
दिल्ली हाई कोर्ट ने मुसलमानों से शादी करने वाली हिंदू महिलाओं पर तीन तलाक को रोकने के लिए एक याचिका को खारिज कर दिया।

अप्रैल 29, 2017
विपक्ष ने बीजेपी और पीएम मोदी पर आरोप लगाया कि वोट बैंक बढ़ाने के लिए वह तीन तलाक को राजनीतिक मोड़ दे रहे हैं। वहीं भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुस्लिम पुरुष तीन तलाक का इस्तेमाल कई पत्नियां रखने के लिए करते हैं। 

मई 3, 2017
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक और हलाला जैसे मुद्दे के लिए सलमान खुर्शीद को न्यायमित्र बनाया। 

मई 11, 2017
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केवल तीन तलाक की संवैधानिकता पर अपना फैसाल सुनाएगा। 

मई  12, 2017
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक मुस्लिमों में शादी तोड़ने का सबसे बुरा और अवांछनीय तरीका है। 

मई  15, 2017
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर कोर्ट के फैसले में तीन तलाक असंवैधानिक घोषित होता है, इस स्थिति में केंद्र सरकार को मुस्लिम समाज में शादी और तलाक को लेकर नया कानून बनाना चाहिए। 

मई 16, 2017
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि तीन तालाक 1,400 साल पुराना मुद्दा है। जब विश्वास की बात हो रही हो, तो संवैधानिक नैतिकता और बराबरी तब पैदा नहीं हो सकती है। 
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मई 17, 2017
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से पुछा कि क्या महिलाएं निकाहनामा में ही तीन तलाक के मुद्दे पर 'नहीं' बोल सकती हैं। 

मई 18, 2017
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक की संवैधानिक वैधता के खिलाफ याचिकाओं पर सुनावई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 
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