एआईएडीएमके ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल
पिछली बार तीन तलाक विधेयक को राज्यसभा में पेश करने पर इसे विस्तृत चर्चा के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया था। विधेयक का कांग्रेस ने समर्थन तो किया था लेकिन उसका कहना था कि इसमें कुछ संशोधन किए जाएं। विपक्ष की मांग को ध्यान मे रखते हुए सरकार ने इसमें संशोधन करके इसे लोकसभा से पास करवा लिया। मगर सरकार की मुश्किलें एआईएडीएमके के वाकआउट ने बढ़ा दी हैं। अमूमन देखा गया है कि एआईएडीएमके मुश्किल घड़ी में सरकार का साथ देती है।
सरकार के पास नहीं है पूर्ण बहुमत
राज्यसभा में वर्तमान सदस्यों की संख्या 244 है। जिसमें से 4 नामित हैं। राज्यसभा में पहले के मुकाबले भाजपा की ताकत बढ़ी है लेकिन उसके पास इतनी संख्या नहीं है कि वह विपक्षी सहयोग के बिना किसी विधेयक को पास करवा सके। आंकड़ों को देखें तो एनडीए के पास 97 सदस्य हैं। जिसमें 73 भाजपा, 6 जदयू, 5 निर्दलीय, 3 शिवसेना, 3 अकाली दल, 3 नामित सदस्य, 1 बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट, 1 सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, 1 नगा पीपल्स फ्रंट और 1 आरपीआई के सांसद हैं।
विपक्ष की संख्या ज्यादा
विपक्ष के आंकड़ों की बात करें तो संख्या के हिसाब से उसका पलड़ा भारी है। तत्कालीन हालात में विपक्ष के पास 115 सांसद हैं। जिसमें 50 कांग्रेस, 13 टीएमसी, 13 सपा, 6 टीडीपी, 5 राजद, 5 सीपीएम, 4 डीएमके, 5 बसपा, 4 राकंपा, 3 आप, 2 सीपीआई, 1 जद(एस), 1 करेल कांग्रेस (मनी), 1 इनेलो, 1 आईयूएमएल, 1 निर्दलीय और 1 नामित सांसद हैं।
इन सासंदों पर है सरकार की नजर
कुछ ऐसे सांसद भी हैं जो अलग-अलग समय पर अपना स्टैंड बदलते रहे हैं। उन्हे सत्ता पक्ष या विपक्ष की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है लेकिन इनकी भूमिका अहम होती है। इन दलों के नाम हैं- एआईएडीएमके, पीडीपी, बीजद और वाईएसआरसीपी जिनके सांसदों की संख्या 32 है। जहां पीडीपी और एआईएडीएमके ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है। वहीं 9 सांसदों वाली बीजद, 6 सांसदों वाली टीआरएस और 2 सांसदों वाली वाईएसआरसीपी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ऐसे में सरकार को इनसे उम्मीद है।