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स्वस्थ धरा, खेत हरा कार्यक्रम की भव्य शुरुआत, किसानों ने विशेषज्ञों से पूछे सवाल

Sun, 30 Dec 2018 08:56 PM IST
Avdhesh Kumar अमित शर्मा, नई दिल्ली
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स्वस्थ धरा खेत हरा कार्यक्रम
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अमर उजाला की अगुवाई में 'स्वस्थ धरा, खेत हरा' कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। आज रविवार को दिल्ली के पूसा रोड पर स्थित एपी शिंदे सिम्पोजियम हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में किसान रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। किसानों की उत्सुकता इस बात को लेकर देखते ही बन रही है कि केंद्र सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में उनके लिए किस प्रकार की योजनाएं बनाई हैं और उनका किस प्रकार उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। 
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कुछ किसानों को सरकार के द्वारा शुरू की गई योजनाओं के बारे में अच्छी जानकारी है और वे योजनाओं से मिल रहे लाभ के बारे में अपना अनुभव अन्य किसानों से साझा कर रहे हैं, जबकि कुछ किसान कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों और अन्य किसानों से उनके अनुभव के बारे में पूछ रहे हैं। किसानों की सबसे ज्यादा उत्सुकता इस बात को लेकर देखी जा रही है कि आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कृषि से जुड़ी किन योजनाओं की शुरूआत करने वाले हैं।
 
इस कार्यक्रम में अमर उजाला द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'स्वस्थ धरा, खेत हरा' का विमोचन केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के हाथों से किया जायेगा। इस पुस्तिका और आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं के बारे में जानकारी देना है। 
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किसान इन योजनाओं का लाभ किस प्रकार ले सकते हैं, इसके लिए उन्हें कहां से मदद मिल सकती है, इन सभी बातों के बारे में जानकारी दी जायेगी। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई अनेक योजनाओं में से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, यूरिया की नीम कोटिंग, मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा करने की योजना और किसानों की आय बढ़ाने से सम्बंधित अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। 
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कृष्णा यादव की अनुकरणीय कहानी

कृषि मंत्रि राधा मोहन सिंह
अमर उजाला के कार्यक्रम स्वस्थ 'धरा, खेत हरा' में पहुंची एक महिला किसान की कहानी किसी को भी उत्साह से भर देगी। गुरुग्राम की रहने वाली कृष्णा यादव ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि कुछ दिनों पहले उन्हें भी किसानी घाटे का सौदा लगती थी। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसी बीच उन्हें अपनी एक दोस्त से अचार बनाने की ट्रेनिंग के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने ट्रेनिंग ली। अपने ही खेतों में पैदा हुई सब्जियों से उन्होंने अचार बनाया। 

उन्हें बेचने के लिए पति को गांव की एक सड़क के किनारे खड़ा कर दिया। कम पढ़ी-लिखी कृष्णा यादव की आंखें यह बताते हुए भर आईं कि शुरू-शुरू में लोगों ने उनका उनके पति का और उनके काम का खूब मजाक उड़ाया। लेकिन मेरी मेहनत रंग लाई। हमारा काम चल निकला। आज मेरे पास अचार बनाने की चार कम्पनियां हैं और मैं अपने जैसी हजारों महिलाओं को ट्रेनिंग दे रही हूं। 

एक अन्य किसान वेदपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं से उन्हें अच्छा लाभ मिला है। पिछले वर्ष ही उनकी फसल खराब हुई थी। अगर कृषि बीमा से उन्हें राहत न मिली होती तो उनकी माली हालत बेहद खराब हो चुकी होती। लेकिन बीमे से मिली रकम की वजह से उनकी खेती फिर से हरी-भरी हो गई।
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