इस माह की शुरुआत में लोकसभा कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा में बैठे दो लोगों ने सभी को उस वक्त चौंका दिया था, जब वे अचानक वहां से कूदकर सांसदों के बीच जा पहुंचे थे। इस घटना को लेकर विपक्ष दल लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। अब तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि संसद गहरे-अंधेरे चैंबर में तब्दील हो गई है।
ओ ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि जब साल 2001 में संसद पर हमला हुआ था, उस समय संसद में खुलकर तीन दिन तक चर्चा हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा में बयान दिए थे। वहीं, अब इस साल हुए हमले पर ध्यान दिया जाए तो सरकार चुप है। गृह मंत्री के बयान देने की मांग करने पर 146 सांसद निलंबित कर दिए गए।
उन्होंने कहा कि आज संसद एक गहरे, अंधेरे चैंबर में बदल गई है।
यह है मामला
गौरतलब है, 13 दिसंबर को सुरक्षा के पुख्ता सुरक्षा इंतजाम के बावजूद लखनऊ निवासी सागर शर्मा और मैसूर निवासी डी. मनोरंजन संसद में जूते में छिपाकर स्मोक केन (धुआं बम) लेकर घुस गए थे। वहीं, संसद के बाहर पुलिस के सामने ही नीलम व अमोल शिंदे ने पीले व लाल रंग के स्मोक केन चला दिए और पुलिस उन्हें रोक नहीं पाई थी। इसके बाद सामने आया कि लोकसभा की दर्शक दीर्घा से सदन में कूदने वाले व्यक्ति को पास सिम्हा के कार्यालय ने जारी किए थे, जिसके बाद राजनीतिक विवाद पैदा हो गया और शीतकालीन सत्र के लिए संसद से 143 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग
इस घटना के बाद से ही विपक्षी सांसद लगातार सुरक्षा उल्लंघन पर चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह से एक बयान की मांग कर रहे हैं। सदन में सासंदों ने अपनी मांग जोर-शोर से उठाई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। साथ ही, लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 46 विपक्षी सांसदों को अनुशासनहीनता के लिए निलंबित कर दिया गया था।
विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव
हंगामे के कारण सबसे पहले ओ ब्रायन को ही निलंबित किया गया था, जिसके बाद भी वो सदन में बने रहे। इसकी वजह से उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया गया। इस मामले को सदन की विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया गया है।
संसद के रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर 2001 में संसद पर हमले के बाद दोनों सदनों में बहस हुई थी। तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने बहस का जवाब दिया था, जबकि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दोनों सदनों में हस्तक्षेप किया था।