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Foundation Day Of Trinamool Congress: 24 में 24 पर नजर, क्या ममता बनर्जी लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोक पाएंगी ?

प्रतिभा ज्योति
Updated Sat, 01 Jan 2022 01:21 PM IST

सार

क्या 2024 में एकजुट विपक्ष का चेहरा बनकर उभरेंगी ममता? क्या उनका आक्रामक रवैया एनडीए के नेतृत्व वाली भाजपा को 2024 में सत्ता में आने से रोकेगा? ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन ये तय है कि ममता ने एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत तो कर दी है। आज शनिवार यानी एक जनवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के स्थापना दिवस के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को  बधाई दी। 
 
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ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला

पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे को सत्ता से बेदखल करने के लिए आज ही के दिन 1998 में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के बाद ठीक 24 साल बाद पार्टी की नजर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर है। पिछले साल अप्रैल -मई में हुए विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी ने 292 विधानसभा सीटों में से 213 पर जीत हासिल की। इसके बाद देश भर में अपनी पार्टी का विस्तार करने की कोशिश के साथ- साथ पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सीधी चुनौती देते हुए दिख रही हैं।

वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के कमजोर पड़ने की वजह से तृणमूल कांग्रेस इस जगह को भी हथियाने का प्रयास कर रही है, क्योंकि उनकी पुरानी पार्टी भाजपा के खिलाफ लड़ाई में लगतार पिछड़ती जा रही है। इसके लिए टीमसी कांग्रेस और भाजपा समेत उन दलों के कई नेताओं को निशाना बनाते हुए अपनी पार्टी में शामिल कर रही हैं जो उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। ताकि अलग-अलग राज्यों में टीएमसी का संगठन मजबूत हो और 2024 के लोकसभा चुनाव में वह एक मजबूत संगठन और पैन इंडिया मौजूदगी के साथ उतर सकें।  



पार्टी की रीब्रांडिंग
ममता की राष्ट्रीय महत्वकांक्षा को  पूरा करने के लिए पार्टी की रीब्रांडिंग की जा रही है। यहा तक की पार्टी का संविधान तक भी बदलने की तैयारी हो रही है जिससे  केवल पश्चिम बंगाल की पार्टी माने जाने वाली तृणमूल कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी बनाया जा सके। भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए और विपक्षी एकता को मजबूत करने की अपील के साथ टीएमसी ने पिछले छह महीनों में गोवा, हरियाणा, त्रिपुरा और मेघालय में अपना पार्टी ऑफिस खोला है। असम, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात में भी टीएमसी अपने संगठन का विस्तार कर रही है। इसी कड़ी में हर राज्य में युवा और प्रभावशाली नेताओं को पार्टी से जोड़ा जा रहा है। पार्टी गोवा में विधानसभा चुनाव भी लड़ रही है। अगले साल त्रिपुरा विधानसभा चुनाव भी लड़ने की तैयारी हो रही है। हाल ही में संपन्न कोलकाता नगर निगम चुनाव में टीएमसी चुनाव में पार्टी ने 144 वार्डों में से 134 पर जीत हासिल की है।

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ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला
पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे को सत्ता से बेदखल करने के लिए आज ही के दिन 1998 में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के बाद ठीक 24 साल बाद पार्टी की नजर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर है। पिछले साल अप्रैल -मई में हुए विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी ने 292 विधानसभा सीटों में से 213 पर जीत हासिल की। इसके बाद देश भर में अपनी पार्टी का विस्तार करने की कोशिश के साथ- साथ पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सीधी चुनौती देते हुए दिख रही हैं।

वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के कमजोर पड़ने की वजह से तृणमूल कांग्रेस इस जगह को भी हथियाने का प्रयास कर रही है, क्योंकि उनकी पुरानी पार्टी भाजपा के खिलाफ लड़ाई में लगतार पिछड़ती जा रही है। इसके लिए टीमसी कांग्रेस और भाजपा समेत उन दलों के कई नेताओं को निशाना बनाते हुए अपनी पार्टी में शामिल कर रही हैं जो उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। ताकि अलग-अलग राज्यों में टीएमसी का संगठन मजबूत हो और 2024 के लोकसभा चुनाव में वह एक मजबूत संगठन और पैन इंडिया मौजूदगी के साथ उतर सकें।  

पार्टी की रीब्रांडिंग
ममता की राष्ट्रीय महत्वकांक्षा को  पूरा करने के लिए पार्टी की रीब्रांडिंग की जा रही है। यहा तक की पार्टी का संविधान तक भी बदलने की तैयारी हो रही है जिससे  केवल पश्चिम बंगाल की पार्टी माने जाने वाली तृणमूल कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी बनाया जा सके। भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए और विपक्षी एकता को मजबूत करने की अपील के साथ टीएमसी ने पिछले छह महीनों में गोवा, हरियाणा, त्रिपुरा और मेघालय में अपना पार्टी ऑफिस खोला है। असम, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात में भी टीएमसी अपने संगठन का विस्तार कर रही है। इसी कड़ी में हर राज्य में युवा और प्रभावशाली नेताओं को पार्टी से जोड़ा जा रहा है। पार्टी गोवा में विधानसभा चुनाव भी लड़ रही है। अगले साल त्रिपुरा विधानसभा चुनाव भी लड़ने की तैयारी हो रही है। हाल ही में संपन्न कोलकाता नगर निगम चुनाव में टीएमसी चुनाव में पार्टी ने 144 वार्डों में से 134 पर जीत हासिल की है।

पीएम मोदी के साथ ममता बनर्जी। - फोटो : ANI
मोदी के खिलाफ मुख्य विपक्षी चेहरा ममता 
ममता शुरू से ही भाजपा की कटु आलोचक रही हैं। तृणमूल सुप्रीमो राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा के खिलाफ विपक्ष की धुरी बनकर उभर रही हैं। नवंबर महीने में हुई उनकी दिल्ली-मुंबई की यात्रा और विपक्ष को एकजुट करने का उनका प्रयास केवल यह साबित करता है कि वह खुद को 'विपक्ष की मुख्य नेता और 2024 के चुनाव के लिए संभावित प्रधानमंत्री पद के प्रमुख उम्मीदवार' के रूप में पेश कर रही हैं।
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जानकारी के मुताबिक सितंबर 2021 में उत्तरी कोलकाता में पार्टी की आंतरिक बैठक में वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि 2024 के चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ ममता बनर्जी विपक्ष का चेहरा होंगी न कि राहुल गांधी। उन्होंने कहा कि मैंने राहुल गांधी को लंबे समय से देखा है और उन्होंने खुद को मोदी के विकल्प के रूप में विकसित नहीं किया है। पूरा देश ममता चाहता है इसलिए हम ममता का चेहरा रखेंगे और प्रचार करेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या टीएमसी सुप्रीमो 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष का नेतृत्व कर सकती हैं।

दीदी के लिए प्रशंसा की बाढ़
पार्टी  के एक वरिष्ठ नेता ने कहा ‘हम ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम से जाने जाते हैं लेकिन अभी तक हम केवल बंगाल में थे। अब वाकई नाम के अनुरूप काम करने की मंशा है...पूरे भारत में फैलने की और हम कांग्रेस के लिए कोई जगह नहीं छोड़ना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि 2024 तक ममता बनर्जी विपक्ष के नेता का मुख्य चेहरा बनें। वे कहते हैं पश्चिम बंगाल चुनाव जीतने के बाद दीदी के लिए प्रशंसा की बाढ़ आ गई है और लोग देश और संविधान को बचाने के लिए ममता बनर्जी की ओर देख रहे हैं।
 

ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई
ममता का यह सपना कैसे पूरा होगा? 
बंगाल की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार गौतम लहरी के मुताबिक टीएमसी कांग्रेस का विकल्प बनने की कोशिश कर रही है। पार्टी इस मकसद में कितना कामयाब होगी यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन इतना तो है कि इसमें ज्यादा नुकसान कांग्रेस का है, भाजपा को इससे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचने वाला। 

उनका मानना है कि 2024 के आम चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रमुख विपक्षी चेहरा बनने के लिए ममता को अपनी पार्टी को ने केवल दूसरे राज्यों में ले ही जाना होगा, बल्कि वहां सरकार भी बनाने की सख्त जरूरत होगी। कुछ राज्यों में सरकार बनाए बिना और पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में अधिकतम सीटें जीते बिना ममता के लिए यह सपना पूरा करना मुश्किल हो सकता है। वह त्रिपुरा और गोवा जैसे राज्यों से शुरुआत करना चाहती हैं क्योंकि त्रिपुरा उनका सबसे नजदीकी राज्य हैं। वहीं टीएमसी ने उन छोटे-छोटे राज्यों पर फोकस किया है जहां क्षेत्रीय दल नहीं है।

कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी
एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि त्रिपुरा के निकाय चुनावों में ममता की पार्टी को झटका लगा है। गोवा में इस साल फरवरी में चुनाव होंगे। गोवा के नतीजे बता देंगे कि राष्ट्रीय राजनीति का सफर तय करना ममता के लिए आसान होने वाला है या नहीं। यदि ममता की पार्टी गोवा में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराती है तो इससे दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ने के लिए पार्टी का आत्मविश्वास और बढ़ेगा। हालांकि 2024 में ममता के विपक्ष का मुख्य चेहरा बनने के बारे में फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि वे कांग्रेस के बिना यह कामयाबी हासिल करना चाहती है और इसके लिए उन्हें यूपीए के साथियों को अपने पाले में लाना होगा।  
 

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी। - फोटो : ANI
मेघालय में मुख्य विपक्षी पार्टी बनी टीएमसी
अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार की कोशिश के तहत मेघालय में जहां टीएमसी को आंशिक सफलता हाथ लगी है वहीं त्रिपुरा में निराशा हाथ लगी है। टीएमसी का मेघालय में कोई अस्तित्व नहीं माना जाता था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा के नेतृत्व वाले कांग्रेस के 17 विधायकों में से 12 के टीएमसी में शामिल होने के बाद टीएमसी के पूर्वोत्तर के इस राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है। त्रिपुरा में, पार्टी सत्तारूढ़ भाजपा को चुनौती देना चाहती है हालांकि राज्य में हाल ही में हुए निकाय चुनावों में उसकी हार हुई है और भाजपा ने जबरदस्त जीत हासिल की है।

अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के इरादे जता दिए थे
ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी जिन्हें पिछले साल पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने पिछले साल अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी की जीत के बाद जून में पार्टी के इरादे जता दिए थे और कहा था हम सत्ता मे आने के लिए हर राज्य में लड़ेंगे, एक दो सीट के लिए नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा था विधानसभा चुनावों में भाजपा को हराने के लिए टीएमसी को धन्यवाद देते हुए पूरे भारत के लोगों से लगभग एक लाख ईमेल मिले थे। हम हर उस राज्य में भाजपा से भिड़ेंगे जहां टीएमसी ने अपनी नींव रखी है।

उन्होंने कहा था टीएमसी को राष्ट्रीय पार्टी बनाने का यह प्रयास हमारे पिछले प्रयासों से बहुत अलग होगा। हम सिर्फ एक या दो विधायक बनाने या अपना वोट शेयर बढ़ाने के लिए किसी भी राज्य में नहीं जाएंगे। हम भाजपा से मुकाबला करेंगे और चुनाव जीतेंगे।"
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