बंधुआ मुक्ति आंदोलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध स्वामी अग्निवेश का जाना इस संसार से केवल एक शरीर का जाना भर नहीं है। यह उस आंदोलन का कमजोर होना भी है जो सर्वसमाज की एकता में विश्वास रखता है और जो सभी लोगों में एक समान तत्त्व की प्रधानता की सिर्फ बात ही नहीं करता था, बल्कि उसे अपनी आत्मा में स्वीकार भी करता था। यह विचार स्वामी अग्निवेश के देहावसान के बाद रखी गई श्रद्धांजलि सभा में स्वामी आर्यवेश ने रखा।
स्वामी आर्यवेश ने कहा कि स्वामी अग्निवेेश ने अपने पूरे जीवन भर स्त्री-पुरूष समानता के लिए संघर्ष किया। अपने जीवन में उन्होंने समाज के हर व्यक्ति का सम्मान करना सिखाया वह चाहे किसी भी धर्म-जाति, लिंग या स्थान का हो। उनकी यही विशेषता आज के समाज को स्वीकार करना चाहिए तभी समाज के टकराव को कम किया जा सकता है।
आर्य प्रतिनिधि सभा एवं बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को गुरुकुल गौतम नगर में स्वामी अग्निवेश के जन्म दिवस एवं विश्व अंतर्राष्ट्रीय विश्व शांति दिवस के उपलक्ष में एक प्रेरणा सभा का आयोजन किया गया।
आयोजित प्रेरणा सभा में स्वामी अग्निवेश को कई गणमान्य वरिष्ठ महानुभावों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और समाज कार्य की दिशा में भविष्य की कार्य योजना के संबंध में संकल्प लिया भी लिया। कार्यक्रम का संचालन बंधुआ मुक्ति मोर्चा के क्रांतिकारी नेता प्रोफेसर विट्ठल राव ने किया।
स्वामी अग्निवेश जो कि अंतर्राष्ट्रीय आर्य सन्यासी के रूप में विख्यात थे और उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक एक सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में समाज के अंतिम व्यक्ति के सर्वांगीण विकास, उसके मौलिक अधिकारों तथा समाज में सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए संघर्ष करते रहे।