मिशन रफ्तार के तहत रेलवे ने दो सौ किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से चलने वाले इंजन का पहला ट्रायल रन कर लिया है। जल्द ही बारह हजार अश्व शक्ति वाले 19 इंजन भारतीय रेलवे के बेड़े में शामिल होंगे। इस इंजन का ट्रायल जर्मनी के सहयोग से किया गया है। इसके बाद यह इंजन जर्मनी की तकनीक पर बिहार के मधेपुरा में रेल इंजन फैक्ट्री में तैयार किये जाएंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार डबल अश्व शक्ति वाले एक हजार इंजन जर्मनी की तकनीक पर बनाए जाएंगे। अभी तक रेलवे के बेड़े में महज छह हजार अश्व शक्ति वाला ही इंजन है। इस इंजन के सहारे यात्री ट्रेन औसत 30 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चलती है। जर्मन तकनीक पर आधारित इस इंजन से औसत रफ्तार 80-90 प्रति किमी करने की योजना है।
बता दें कि ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने व ज्यादा कोच वाली ट्रेन चलाने के लिए रेलवे इन दिनों कई ट्रेनों में जरूरत पड़ने पर एक ही ट्रेन में दो-दो इंजन जोड़कर चला रहा है। इसी तरह मालगाड़ी भी दो इंजनों के सहारे चल रही है। लेकिन अब एक ही इंजन ज्यादा से ज्यादा माल वाहक बन सकेगा व ज्यादा से ज्यादा कोच लेकर पूरी ताकत के साथ दो सौ किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ सकेगा।