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अगर आप मोटे हैं और इस बीमारी से पीड़ित हैं, तो उपचार का प्रभाव आधा हो जाएगा

Tue, 29 Oct 2019 07:22 PM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कुछ बीमारी ऐसा होती हैं, जिनका इलाज तो है, दवाएं भी हैं, इसके बावजूद उनके उपचार का प्रभाव आधा होता है। ऐसे मरीजों पर इलाज का प्रभाव आधा उस स्थिति में होता है, जब वे साथ-साथ किसी दूसरी बीमारी से भी पीड़ित होते हैं। हम यहां बात कर रहे हैं कि सोराइसिस बीमारी की। अगर कोई व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित है और साथ में वह मोटापे से भी पीड़ित है तो उसे इलाज का पूरा फायदा नहीं मिलेगा। शोध के अनुसार, सोरियाटिक आर्थराइटिस (पीएसए) से पीड़ित मोटे लोगों पर उपचार का प्रभाव सामान्य वजन वाले रोगियों की तुलना में 48 प्रतिशत तक कम होता है। 

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बहुत से लोगों को यह बात मालूम नहीं है कि पीएसए का मोटापे के साथ गहरा सम्बंध है। बता दें कि हर साल 29 अक्तूबर का दिन दुनिया में 'विश्व सोराइसिस दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस साल की ग्लोबल थीम में सोराइसिस के लक्षणों के महत्व पर जोर डाला गया है। दुनियाभर में तीन फीसदी आबादी यानी करीब 12.50 करोड़ लोग सोराइसिस की बीमारी से प्रभावित हैं। एम्स, नई दिल्ली में कार्यरत डॉ. दानवीर भादु ने बताया, हमारे देश में सोरियाटिक आर्थराइटिस जैसी बीमारी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह बीमारी आमतौर पर सोरियासिस के रोगियों में पाई जाती है। जोड़ों में प्रदाह और अकड़न इसके लक्षण हैं। 

पीएसए के रोगियों की उंगलियां, पंजे, घुटने और रीढ़ में सूजन भी आ जाती है। इसके चलते दर्द शुरू होता है। अगर सही समय पर जांच एवं उपचार न हो तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को आरंभिक अवस्था के दौरान नाखून खोखले होना या उनका बेरंग हो जाना, जैसी स्थितियों से जूझना पड़ सकता है। इस बार वर्ल्ड सोरियासिस डे पर गठिया रोग विशेषज्ञों ने सोरियाटिक आर्थराइटिस को सोरियासिस की प्रमुख सहरूग्णता के तौर पर लेने का आग्रह किया है। इसके संकेतों और लक्षणों पर अधिक ध्यान दिया जाए। यदि समय रहते इस बीमारी का पता लग जाता है तो इलाज का प्रभावी प्रबंधन तथा उपचार सुनिश्चित किया जा सकता है।
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द आर्थराइटिस फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है कि अधिक वजन वाले या मोटे लोगों को सोरियासिस या पीएसए होने का खतरा अधिक होता है। इसे लेकर कई अध्ययन हुए हैं। उनकी रिपोर्ट बताती है कि सोरियाटिक आर्थराइटिस के मोटे रोगियों को इस स्थिति के प्रबंधन में कठिनाई होती है। मोटापा होने के कारण मरीज को हृदय रोग, आघात, मधुमेह और अन्य चयापचय स्थितियों का जोखिम भी हो सकता है। इससे पीएसए से पीड़ित व्यक्ति की स्थिति और अधिक खराब हो सकती है।  शोध के अनुसार, पीएसए से पीड़ित मोटे लोगों पर उपचार का प्रभाव सामान्य वजन वाले रोगियों की तुलना में करीब आधा रहता है। 

डॉ. दानवीर भादु के मुताबिक, सोरियाटिक आर्थराइटिस, गठिया रोग विज्ञान में सबसे खतरनाक गठिया माना जाता है। डीएमएआरडी एवं जैविक दवाओं के साथ समय पर उपचार शुरू करने से इसपर नियंत्रण हो सकता है। विभिन्न अध्ययनों का डाटा बताता है कि सोरियाटिक आर्थराइटिस की तीव्रता सामान्य रोगियों की तुलना में मोटे रोगियों में अधिक होती है। बीएमआइ>25kg/m2 और वजन कम करने से इस रोग पर नियंत्रण करने में काफी मदद मिलती है। पीएसए के मोटे रोगियों का वजन कम होने से उन्हें लंबी अवधि तक आराम मिलता है, क्योंकि शरीर का प्रदाह कम हो जाता है। 
 
एक किलोग्राम वजन कम होने से घुटनों का चार किलोग्राम दबाव कम हो जाता है
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि मोटापे से जोड़ों में तनाव और क्षति होती है। यदि पीएसए के रोगियों का वजन अधिक होता है, तो उनके घुटनों की ताकत बहुत प्रभावित होती है, इसलिए शरीर का थोडा बहुत वजन कम करने से इलाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जैसे एक किलोग्राम वजन कम होने से घुटनों का चार किलोग्राम दबाव कम हो जाता है। पीएसए का बेहतर प्रबंधन करने के लिए जीवन शैली में बदलाव लाना और उसे स्वस्थ बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसमें रोजाना संतुलित आहार लेना और स्मोकिंग छोड़ना भी शामिल है।  

सोरियाटिक आर्थराइटिस के रोगियों को दैनिक व्यायाम में अक्सर कठिनाई होती है, जिसका कारण दर्द है। हालांकि उन्हें हर दिन एक समय में कम से कम 15-20 मिनट व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम की योजना रोगी की स्थिति की गंभीरता के आधार पर बनाना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। यदि सही मार्गदर्शन के साथ स्ट्रेचिंग, चलना, तैरना, योग, साइकिल चलाना, डांस और पिलेट्स जैसे व्यायाम किये जाएं, तो रोगी को काफी हद तक मदद मिल सकती है। 

सोरियाटिक आर्थराइटिस का कोई स्थाई उपचार नहीं है और प्रदाह का समय अलग-अलग रोगियों में अलग-अलग होता है। समय पर जांच और उपचार से इसके लक्षणों पर प्रभावी नियंत्रण करने में मदद मिल सकती है। साधारण शारीरिक जांच या एक्स-रे से यह भी पता लगाया जा सकता है कि किसी रोगी में सोरियासिस का व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहास तो नहीं है। 

रोगियों को गठिया रोग विशेषज्ञ जैसे विशेषीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। वजन का प्रबंधन करने के लिए पोषण विशेषज्ञ की सलाह भी जरूरी है। इससे पीएसए की बढ़त रोकने में मदद मिलेगी और उपचार पर अच्छी प्रतिक्रिया से जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी। 

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