कारोबार में आसानी के लिए ढुलाई की लागत कम कैसे हो, इस दिशा में केन्द्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। अब रेलवे ने अपने कुछ कंटेनरों को रेलगाड़ी से ढोने के बजाय पानी के जहाज के ढोना शुरू दिया है। शुरूआत कांडला से तूतीकोरिन मार्ग पर हुई है, जिसे कुछ अन्य मार्गों पर भी बढ़ाने की योजना है।
केन्द्रीय भूतल परिवहन, राजमार्ग एवं पोत परिहवन मंत्री नितिन गडकरी और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को यहां इस सेवा की शुरूआत की। इस अवसर पर गडकरी ने बताया कि भारत में परिवहन लागत ज्यादा होने की वजह से कारोबारी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं। इसलिए सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है कि कैसे परिवहन लागत कम की जा सके। दुनिया के अन्य देशों में इस समय जहां परिवहन लागत आठ फीसदी के आसपास है वहीं भारत में यह 13 से 14 फीसदी बैठ रहा है। इसे यदि चार फीसदी भी कम कर दिया जाए तो भारत से निर्यात में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि यहां एक किलो सामान की ढुलाई पर सड़क मार्ग से 10 रुपये का भाड़ा पड़ रहा है तो उसे रेलगाड़ी से ले जाने पर छह रुपये का भाड़ा पड़ेगा। लेकिन यदि उसकी जल मार्ग के जरिये की जाए तो वही भाड़ा घट कर एक रुपया प्रति किलो रह जाएगा। यही नहीं, अब पानी के जहाज में भी डीजल या बंकर ऑयल के उपयोग के बदले मेथनॉल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस -एलएनजी- का उपयोग करने पर विचार किया जा रहा है। ऐसा हो जाने पर तो परिवहन लागत घट कर एक रुपया के बदले 40-50 पैसे रह जाएगी।
नितिन गडकरी का कहना है कि मेथनॉल की प्रति लीटर कीमत इजरायल में 12 रुपये, चीन में 16 रुपये जबकि भारत में 22 रुपये है। जबकि डीजल की कीमत तो 60 रुपये से ऊपर है। मेथनॉल का उत्पादन देश में ही होगा जबकि डीजल का आयात होता है। इसलिए यह हर तरह से बेहतर है।
इस समय रेलवे के सार्वजनिक उपक्रम कंटेनर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड -कॉनकोर- ने कांडला बंदरगाह से कोच्चि, मंगलोर होते हुए तूतीकोरिन तक की सेवा शुरू की है। इसमें सामान ढुलवाने वाले को कुछ नहीं करना होगा बल्कि सड़क, रेल और जल मार्ग में परिवहन की इंड टू इंड सेवा कॉनकोर ही देगी। इस मार्ग पर सेवा की शुरूआत के बाद पश्चिमी तट से पूर्वी तट और बंगलादेश तक भी सेवा शुरू करेगी।