देशभर में जहां तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होने को लेकर उग्र राष्ट्रवादियों और आजाद खयालों वाले वामपंथियों के बीच बहस चल रही है वहीं दूसरी ओर तेलंगाना का एक छोटा सा कस्बा इन सभी के लिए एक सबक बन गया है।
ये कस्बा करीमनगर जिले का है जहां हर रोज अब सुबह 8 बजे जिंदगी थम जाती है। सड़कों पर दौड़ते वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगने के साथ ही हर एक शख्स राष्ट्रगान के सम्मान में 52 सेकेंड्स के लिए खड़ा होता है और तिरंगे को सेल्यूट करता है।
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चाहें वो सड़क पर चलते लोग हों या स्कूलों में बैठे छात्र। सब्जी और रेहड़ी पटरी वाले हों या दुकानदार सभी इन 52 सेकेंड्स के लिए अपने कामों को रोककर राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होते हैं।
राष्ट्रगान बजने का कार्यक्रम हर रोज होगा
- फोटो : HT
हर रोज यहां पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर राष्ट्रगान बजता है और पूरा कस्बा इस अभियान में शामिल होता है। इस आइडिया की शुरुआत करने वाले जम्मीकुंता के पुलिस इंस्पेक्टर पिंगिली प्रशांत रेड्डी कहते हैं कि इस तरह के अभियान की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस के मौके से बेहतर नहीं हो सकती।
अब हमारे यहां स्थायी तौर पर इस तरह राष्ट्रगान बजने का कार्यक्रम हर रोज होगा। वो आशा करते हैं कि जिले के अन्य हिस्सों में भी जल्द ही इस तरह के कार्यक्रम स्थाई तौर पर शुरू होंगे।
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रेड्डी ने अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि राष्ट्रीय त्योहारों को आज के युवा सामान्य छुट्टियों की तरह समझते हैं। वो इस दिन देर तक सोते हैं। रेड्डी कहते हैं कि सिनेमाघरों में हर फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाए जाने के आदेश के बाद से बदलाव आया है।
कस्बे में 16 जगह पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाए जाएंगे
रेड्डी कहते हैं कि इस तरह की रेगुलर प्रेक्टिस से लोगों के भीतर राष्ट्रगान के प्रति सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। रेड्डी को अपनी हायर अथॉरिटी से भी उनके इस इनिशिएटिव में सपोर्ट मिल रहा है, जिसमें करीमनगर के पुलिस कमिश्नर भी शामिल है।
जल्द ही 16 जगह पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाए जाएंगे। हर रोज 7.58 मिनट पर राष्ट्रगान के लिए एक मैसेज प्रसारित होगा और ठीक 8 बजे रोज तेलुगु और हिंदी में राष्ट्रगान बजाया जाएगा।
इसके लिए इस कस्बे में ठेर सारे पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगाए गए हैं जिससे लोगों के लिए भीतर इस अभियान के प्रति जागरुकता पैदा हो।