आजादी के बाद से देश में मतदाताओं की संख्या छह गुना बढ़ चुकी है। एक जनवरी को देश में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 94.50 करोड़ हो गई है। खबर के अनुसार, साल 1951 में देश में कुल मतदाता 17.32 करोड़ थे, जो अब बढ़कर 94,50,25,694 से ज्यादा हो गए हैं। हालांकि चुनाव आयोग के लिए चिंता की बात ये है कि बीते लोकसभा चुनाव में करीब एक तिहाई मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया था। ऐसे में मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक लाने के लिए चुनाव आयोग को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
वर्ष मतदाता मतदान
1957 19.37 47.74
1967 21.64 55.42
2009 71.70 58.21
2014 83.40 66.44
2019 91.20 67.40
(मतदाता करोड़ में, मतदान प्रतिशत में)
प्रवासी मतदाताओं का नाम तो अपने गृह राज्य की वोटर लिस्ट में है लेकिन वह किसी और जगह काम करते हैं, जिसके चलते कई कारणों से ऐसे मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाते। चुनाव आयोग इससे निपटने के लिए रिमोट वोटिंग टेक्नॉलोजी का प्रस्ताव दिया है लेकिन इसके लिए राजनीतिक मंजूरी और विधायी ढांचे में बदलाव की जरूरत होगी। इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाताओं को ज्यादा से ज्यादा अपने मताधिकार का इस्तेमाल को प्रेरित करने के लिए चुनाव आयोग कई योजनाओं पर काम कर रहा है।