केंद्र सरकार में सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों, आयोग और ब्यूरो में 'प्रमुखों' के पदों को सेवा विस्तार देकर या फिर अतिरिक्त कार्यभार वाले अफसरों की तैनाती से भरा जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि केंद्र के पास आईएएस या आईपीएस अफसरों की भारी कमी है। इसी साल फरवरी में 29 आईपीएस अफसरों को डीजी या इसके समकक्ष पद के लिए केंद्र की मनोनयन 'एंपेनल्ड' सूची में शामिल किया गया था। इसके बावजूद सीआईएसएफ, एनआईए, बीपीआरएंडडी, सीवीसी, एनसीबी और दिल्ली पुलिस को स्थायी बॉस नहीं मिल सका। यहां तक कि केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला खुद सेवा विस्तार पर हैं। इससे पहले सीबीआई जैसी देश की प्रमुख 'केंद्रीय जांच एजेंसी' के निदेशक पद पर साढ़े तीन महीने बाद स्थायी नियुक्ति हो पाई थी।
मौजूदा समय में सीआईएसएफ, एनआईए, बीपीआरएंडडी, सीवीसी, एनसीबी और दिल्ली पुलिस में बॉस के पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है। मई में सीआईएसएफ के डीजी सुबोध कुमार जायसवाल को सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था। उसके बाद सुधीर कुमार सक्सेना को डीजी का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया। एनआईए के डीजी वाईसी मोदी मई में रिटायर हो गए थे। वहां अभी तक कोई स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है। सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह को एनआईए डीजी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। बीपीआरएंडी का भी ऐसा ही हाल है। एनसीबी यानी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में भी सालभर से नियमित बॉस नहीं है। बीएसएफ के डीजी राकेश अस्थाना ही एनसीबी डायरेक्टर का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं।