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Supreme Court: जीआईबी को लेकर केंद्र ने शीर्ष कोर्ट को दी अहम जानकारी; बताया क्यों विलुप्त हो रहे हैं पक्षी

Tue, 19 Mar 2024 08:47 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुनवाई के दौरान सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने एएसजी भाटी से पूछा था कि कितने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभी जंगल में हैं और कैद में उनकी आबादी लगभग कितनी है?  
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) को लेकर बड़ी जानकारी दी है। केंद्र ने अदालत को बताया कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की संख्या में कमी 1960 के दशक में शुरू हुई थी। शीर्ष अदालत में केंद्र का पक्ष रख रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि  ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की कम जन्म दर, अवैध शिकार, पारिस्थितिकीय कारक और उनके निवास स्थान का विनाश के कारण जीआईबी की संख्या में कमी के कारण हैं। 

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दरअसल, मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने एएसजी भाटी से पूछा था कि कितने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभी जंगल में हैं और कैद में उनकी आबादी लगभग कितनी है? इस पर भाटी ने कहा कि अनुमान के मुताबिक, उनकी संख्या 150 से 200 के बीच है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि शीर्ष अदालत के 19 जनवरी के आदेश के मुताबिक, सरकार ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के संबंध में किए जा रहे प्रयासों को लेकर एक हलफनामा दायर किया है। 

शीर्ष अदालत ने जनवरी में केंद्र से कहा था कि वह सौर ऊर्जा के प्रति भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए जीआईबी को बचाने के लिए एक व्यापक योजना लेकर आए।
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केंद्र हमें आगे का रास्त बताए: सर्वोच्च न्यायालय
तब शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, 'हम चाहते हैं कि केंद्र हमें आगे के रास्ते के बारे में बताए। नहीं तो हम अंधेरे में ही हाथ पैर मारते रहेंगे।' शीर्ष अदालत ने केंद्र से यह भी जानना चाहा कि क्या वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित ऐसा कोई आंकड़ा है कि ये पक्षी बिजली के तारों से टकराकर भी मरते हैं।'

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बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट को लड़कियों को गोद लिए जाने के बारे में जानकारी दी है। HAQ: सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स की सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक भारती अली  ने शीर्ष अदालत में बताया कि गोद लेते समय लड़कियों को पसंद किये जाने की कोई प्रवृत्ति नहीं है। देश में अधिक लड़कियों को छोड़ दिया जाता है। जिससे उनकी संख्या ज्यादा है। इस कारण लड़कों की तुलना में उन्हें गोद लेने की संख्या में वृद्धि हुई है।
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