पिछले दो साल में भारतीय बैंकों का डूबा कर्ज (एनपीए) बढ़ाने में इस तरह की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है। यही वजह है कि बैंकों पर लगभग 10,500 अरब रुपये का एनपीए हो गया है। आईएल एंड एफएस के कई बार डिफॉल्टर होने से इसकी और सहायक कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग भी गिरती गई। इन कंपनियों पर अब तक 910 अरब रुपये का कर्ज बढ़ चुका है।
निजी कंपनियों पर नियंत्रण के अन्य मामले
सरकार किसी निजी कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में शायद ही लेती है। इससे पहले 2017 में सरकार ने रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक लिमिटेड का नियंत्रण लेने का प्रयास किया था जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। अकाउंटिंग घोटाले के कारण 2009 में सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज पर सरकार ने नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था।
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8 अक्टूबर को पहली बैठक
एनसीएलटी ने नए बोर्ड सदस्यों को आम सहमति से अध्यक्ष चुनने की छूट दी है। नए बोर्ड को 8 अक्टूबर को पहली बैठक करने का निर्देश दिया है। नया बोर्ड 31 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर अपने निष्कर्ष और समाधान की रूपरेखा पेश करेगा। साथ ही कंपनी को 15 अक्टूबर तक केंद्र की ओर से उठाए सवालों का जवाब देने का निर्देश भी दिया।
ये होंगे बोर्ड के नए सदस्य
एनसीएलटी के फैसले के बाद अब सरकार कोटक महिंद्रा बैंक के उदय कोटक, सेवानिवृत्त आईएएस अफसर विनीत नय्यर, सेबी के पूर्व अध्यक्ष जीएन बाजपयी, आईसीआईसीआई के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष जीसी चतुर्वेदी, आईएएस अधिकारी मालिनी शंकर और कैग के वरिष्ठ नौकरशाह नंद किशोर को कंपनी के निदेशक बोर्ड में नियुक्त करेगी।