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Tamil Nadu: डीएमके के मंत्री ने भाजपा को दी चेतावनी, तिरुप्परनकुंद्रम मुद्दे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया

Wed, 05 Feb 2025 07:50 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

तमिलनाडु के तिरुप्परनकुंद्रम मुद्दे को लेकर राज्य में राजनीति तेज हो गई है, एक तरफ जहां हिंदू-इस्लामिक संगठनों ने प्रदर्शन किया है। वहीं राज्य में सत्ताधारी दल डीएमके के मंत्री ने भाजपा पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए चेतावनी भी दी है। बता दें कि, यह विवाद 1920 के दशक से अदालतों में उठता रहा है और वर्तमान में भी न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
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पीके शेखर बाबू, मंत्री, तमिलनाडु - फोटो : X / @PKSekarbabu
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विस्तार
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तमिलनाडु के तिरुप्परनकुंद्रम मुद्दे को लेकर डीएमके नेता और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री पीके शेखर बाबू ने भाजपा पर हिंसा भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा दंगे भड़काने की कोशिश करती है, तो मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इसे सख्ती से रोकेंगे। मंत्री ने दावा किया कि 4 फरवरी को मदुरै के पलंगनाथम में हुए विरोध प्रदर्शन में केवल भाजपा के लोग शामिल थे, न कि हिंदू संगठनों के सदस्य। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य सरकार को अस्थिर करने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश कर रही है। 
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भाजपा पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप
शेखर बाबू ने कहा कि भाजपा एक गैर-मुद्दे को तूल देकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है और इसका वोट प्रतिशत अगली बार 'शून्य' तक पहुंच सकता है। उन्होंने भाजपा नेताओं एच. राजा और के. अन्नामलाई को चेतावनी देते हुए कहा कि तमिलनाडु में हिंसा फैलाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी। मंत्री ने आगे कहा, 'उत्तर भारत में आप ऐसा कर सकते हैं, लेकिन तमिलनाडु द्रविड़ संस्कृति और पेरियार ई.वी. रामासामी की भूमि है। मुख्यमंत्री स्टालिन एक सख्त नेता हैं और वह राज्य में शांति बनाए रखेंगे'।  

सरकार अदालत के आदेश का पालन करेगी
शेखर बाबू ने कहा कि तिरुप्परनकुंद्रम मुद्दे से जुड़े कई कानूनी मामले ब्रिटिश शासन से लेकर अब तक चलते आ रहे हैं और सरकार पूरी तरह से अदालत के निर्देशों का पालन करेगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी का दौरा करेंगे। उन्होंने स्थानीय लोगों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लोग इस क्षेत्र में सद्भाव से रहते हैं और बाहरी तत्व इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं।
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भाजपा ने किया पलटवार
वहीं भाजपा तमिलनाडु के प्रमुख के. अन्नामलाई ने इस आरोप को खारिज किया और कहा कि 'प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था'। उन्होंने पूछा, 'क्या कोई हिंसा हुई? क्या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा? कोई बस जलाई गई?' भाजपा नेता ने कहा कि 1931 में प्रिवी काउंसिल ने भी मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था और डीएमके सरकार को इसे पढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तमिलनाडु पुलिस ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया ताकि वे मदुरै में प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।'

कांग्रेस ने भी भाजपा पर साधा निशाना
इधर, तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने कहा कि भाजपा पहले अयोध्या में दंगे भड़का चुकी है और अब वही कोशिश तिरुप्परनकुंद्रम में कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि 6 फरवरी को वे दरगाह और भगवान मुरुगन मंदिर का दौरा करेंगे ताकि सद्भाव बनाए रखा जा सके।

क्या है विवाद?
  • थिरुप्परनकुंद्रम मुद्दे का मुख्य कारण दरगाह परिसर में जानवरों की कुर्बानी और मांसाहार को लेकर विवाद है।
  • दरगाह, थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित है और काशी विश्वनाथ मंदिर के पास ही मौजूद है।
  • हिंदू संगठनों ने दरगाह में पशु बलि और मांसाहार पर आपत्ति जताई है और पहाड़ी का नाम 'सिकंदर हिल' कहे जाने का विरोध किया है।  
  • वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे परंपरागत रूप से वहां पूजा-अर्चना करते आए हैं।

इस मुद्दे पर 5 जनवरी, 2025 को इस्लामिक संगठनों ने प्रदर्शन किया था, जबकि 4 फरवरी, 2025 को हिंदू संगठनों ने मदुरै में बड़ा प्रदर्शन किया। यह विवाद 1920 के दशक से अदालतों में उठता रहा है और वर्तमान में भी न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
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