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Sourav Ganguly Episode: गांगुली के बहाने ममता ने फिर भुनाया बंगाली उपराष्ट्रवाद, भाजपा बैकफुट पर

Thu, 20 Oct 2022 05:35 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से गांगुली की विदाई सामान्य नहीं रह सकी, क्योंकि बंगाल की सीएम व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इसे झटका बताया और पीएम नरेंद्र मोदी से दखल देने की मांग की थी, ताकि 'दादा' को आईसीसी अध्यक्ष के चुनाव का प्रत्याशी बनाने की इजाजत मिल सके। 

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सौरव गांगुली - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस ने सौरव गांगुली-बीसीसीआई मामले को लेकर एक बार फिर बंगाली उपराष्ट्रवाद के मुद्दे को भुना लिया है। इस मामले में भाजपा फिलहाल बैकफुट पर नजर आ रही है, क्योंकि देश के सबसे बड़े क्रिकेट संघ से 'दादा' की विदाई हो गई है, जबकि पार्टी उन्हें लेकर लगातार बड़े बड़े दावे कर रही थी। 

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ममता बनर्जी ने कहा कि अगर प्रसिद्ध क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भी इस तरह वंचित रखा जाता, तब भी वह यही बात कहतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि गांगुली को किसी और के हितों को सुरक्षित रखने के लिए चुनाव लड़ने तक का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सौरव को आईसीसी में क्यों नहीं भेजा गया? यह किसी के हितों को साधने के लिए किया गया। मैंने अनेक भाजपा नेताओं से बात की, लेकिन उनका नाम नहीं भेजा गया। उन्हें वंचित किया गया है। यह शर्मनाक राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है।

दरअसल, बंगाल में जब से भाजपा का उदय हुआ है उसका तृणमूल कांग्रेस से मुकाबला हो रहा है। बाकी विपक्षी दल यानी वामपंथी व कांग्रेस तो हाशिये पर चले गए हैं। ऐसे में ममता बनर्जी की पूरी पार्टी भाजपा को बाहरी पार्टी बताने व बंगाल विरोधी होने का जमकर प्रचार कर रही है। वह बंगाल से जुड़े किसी भी मुद्दे पर भाजपा को नीचा दिखाने में कोई चूक नहीं करती। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान गांगुली की बीसीसीआई से विदाई को भी टीएमसी ने बंगाल हित का मुद्दा बनाकर पेश कर दिया। मामले में वह अभी सियासी लाभ लेती नजर आ रही है। 
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गांगुली की जगह 1983 की विश्व कप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे रोजर बिन्नी को मंगलवार को हुई बीसीसीआई की एजीएम में 36 वां अध्यक्ष चुन लिया गया है। हालांकि, एजीएम में आईसीसी के चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई और यह संपन्न हो गई जबकि, माना जा रहा था कि गांगुली को आईसीसी का शीर्ष पद मिल सकता है। 

जय शाह दूसरी बार चुने गए सचिव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए बीसीसीआई के सचिव चुन लिए गए। 

गांगुली को हटाने का ममता ने बताया था आघात, पीएम से लगाई थी गुहार
बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से गांगुली की विदाई सामान्य नहीं रह सकी, क्योंकि बंगाल की सीएम व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इसे झटका बताया और पीएम नरेंद्र मोदी से दखल देने की मांग की थी, ताकि 'दादा' को आईसीसी अध्यक्ष के चुनाव का प्रत्याशी बनाने की इजाजत मिल सके। 

ममता बनर्जी ने गांगुली की तारीफ करते हुए कहा था कि वे सिर्फ बंगाल का गौरव नहीं है, बल्कि पूरे देश के गौरव हैं और इस मामले को राजनीति या बदले की भावना से नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, तृणमूल नेताओं ने आरोप लगाया था कि गांगुली को इसलिए पद से हटाया जा रहा है, क्योंकि वे बंगाली हैं। 

अब  टीएमसी के लिए एक जीत की स्थिति है। अगर गांगुली को आईसीसी चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती है, तो वह कह सकती है कि टीएमसी की मांग के कारण भाजपा को आखिरकार इसे स्वीकार करना पड़ा। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सौगत रॉय का कहना है कि यदि गांगुली को अनुमति नहीं दी गई तो यह साबित हो जाएगा कि भाजपा बंगाल विरोधी है और हमारे एक प्रतीक का अपमान कर बंगाली गौरव को ठेस पहुंचाएगी।

इस नारे से दी थी बंगाली उपराष्ट्रवाद को हवा
टीएमसी ने चुनावी नारे 'बांग्ला निजेर मेयेकेई चाय' (बंगाल अपनी बेटी चाहता है) गढ़कर बंगाली उप-राष्ट्रवाद को हवा दी थी। इसका इस्तेमाल 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को पराजित करने के लिए जमकर किया गया था। 

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