पश्चिम बंगाल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले के बाद गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को तीन आईपीएस अफसरों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाने का आदेश जारी किया है। इसे लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार में ठन गई है। राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है।
लोकसभा में टीएमसी के वरिष्ठ अधिवक्ता और चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी ने शनिवार को कहा, 'केंद्र अप्रत्यक्ष रूप से आपातकाल लगाने की कोशिश कर रहा है और आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। उस दिन (10 दिसंबर को जब नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था) तीन आईपीएस अधिकारी ड्यूटी पर थे। कल उन्हें गृह मंत्रालय से पत्र मिला है। प्रतिशोधात्मक रवैया स्पष्ट है।'
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को नड्डा की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार तीन आईपीएस अधिकारियों को बंगाल से वापस दिल्ली बुला लिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब भाजपा के काफिले, जिसमें नड्डा का वाहन भी शामिल था, पर पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में हमला किया गया था।
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केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को लिखे पत्र में बनर्जी ने कहा, 'जेड श्रेणी की सुरक्षा मिले व्यक्ति के काफिले में एक पायलट कार और एक टेल कार होती है। यदि कोई अन्य वाहन उस काफिले में प्रवेश करना चाहता है, तो स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए और अनुमति लेनी चाहिए। यहां कोई इजाजत नहीं ली गई। नड्डा के काफिले से आगे और पीछे 50 दोपहिया वाहन और कारें थीं।'
भाजपा की बंगाल इकाई के नेताओं ने बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मुद्दा उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है क्योंकि यह केंद्र और राज्य का मामला है। भाजपा नेताओं ने कहा, 'बनर्जी कौन है? क्या वह राज्य सरकार से हैं? नहीं। क्या वह केंद्र से हैं? नहीं। वह राज्य की सत्ताधारी पार्टी के सांसद हैं। वह क्या साबित करने की कोशिश कर रहे हैं? क्या ऐसा है कि मुख्यमंत्री के पास कोई जवाब नहीं है और इसलिए वह अपने सांसदों को इसका जवाब देने के लिए कह रही हैं जो इस मामले से संबंधित नहीं हैं? पत्र को अब तक कूड़ेदान में फेंक दिया गया होगा।'