तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की मांग की है। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान टीएमसी सांसद रीताब्रत बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बांग्ला किया जाए। इसमें राज्य के इतिहास और संस्कृति की छाप है। इसके अलावा शून्यकाल में अन्य मुद्दे उठाए गए।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा ने जुलाई 2018 में सर्वसम्मति से राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन केंद्र ने इस पर सहमति नहीं जताई। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि पश्चिम बंगाल का नया नाम हमारे राज्य के इतिहास, संस्कृति और पहचान के अनुरूप होगा। साथ ही यह हमारे लोगों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगा।
उन्होंने कहा कि आज कोई पूर्वी पाकिस्तान नहीं है। इसलिए हमारे राज्य का नाम बदलने की जरूरत है। पश्चिम बंगाल के लोगों के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए।
इन जगहों के बदले गए हैं नाम
2011 में उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा किया गया था। इससे पहले 1995 में बॉम्बे का नाम बदलकर मुंबई किया गया था। इसके बाद 1996 में मद्रास का नाम बदलकर चेन्नई और 2001 में कलकत्ता का नाम बदलकर कोलकाता और इसके बाद 2014 में बैंगलोर का नाम बदलकर बंगलूरू किया गया था।
ये मुद्दे भी उठाए गए
राज्यसभा में अन्य मुद्दे भी उठाए गए। बीजद के सांसद देवाशीष सामंतराय ने बाली यात्रा को राष्ट्रीय त्योहार का दर्जा देने की मांग की। वहीं तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि पेट्रोल में सस्ते एथेनॉल का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जाए। सुष्मिता देव ने कहा कि असम में बराक नदी की सफाई की जाए। जलमार्ग का उपयोग माल की आवाजाही के लिए किया जाए।
भाजपा की कविता पाटीदार ने मां की रेलवे लाइन अंडरपास में जलभराव की समस्या का समाधान किया जाए। पीटी ऊषा ने केरल के कोझिकोड ने एम्स की स्थापना की मांग की। भाजपा के एस सेल्वागनबथी ने कहा कि अनियमित मौसम के कारण फसल की पैदावार प्रभावित हुई है। किसानों के नुकसान की भरपाई की जाए।