पश्चिम बंगाल के तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष ने रविवार को अपनी कार पर एक और कथित हमले का आरोप लगाया है। घटना के बाद उनकी क्षतिग्रस्त कार कोलकाता के नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन ले जाई गई।
कुणाल घोष के मुताबिक, फूलबागान इलाके में उनकी कार को निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे अपने खिलाफ जानलेवा हमले की कोशिश बताया और कहा कि वह हमले के बाद सुरक्षा के लिए नारकेलडांगा थाने में पहुंचे और औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं।
टीएमसी विधायक ने हमलावरों के हथियार से लैस होने का लगाया आरोप
कुणाल घोष ने कहा, "आज एक बार फिर मुझे जान से मारने की कोशिश की गई। यह केवल भगवान की कृपा है कि मैं अभी जिंदा हूं। कोलकाता जैसे शहर में रविवार को दिनदहाड़े, जब मैं विधायक के तौर पर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था, तब मुझ पर हमला किया गया।"
उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावर हथियारों से लैस थे। उनके मुताबिक, हमलावरों ने कार का शीशा तोड़ दिया और रिवॉल्वर लहराते हुए उन्हें कार से बाहर खींचने की कोशिश की। कुणाल घोष ने कहा, "वे हथियारों से लैस थे। उन्होंने कार का शीशा तोड़ दिया और रिवॉल्वर दिखाते हुए मुझे बाहर खींचने की कोशिश की। मेरे सुरक्षा कर्मियों को भी अपने हथियार निकालने पड़े।"
भाजपा पर लगाए क्या आरोप?
घोष ने कहा कि हमले के बाद उन्होंने सुरक्षा के लिए नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन में शरण ली है और मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने हमले में भाजपा के शामिल होने का आरोप लगाया। घोष ने कहा, "भाजपा निश्चित तौर पर इसमें शामिल है और पुलिस निष्क्रिय है। अब हमें देखना होगा कि इसमें और कौन-कौन शामिल है।"
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हमलावर उनसे क्या चाहते हैं। घोष ने कहा, "वे क्या चाहते हैं? क्या वे मेरी लाश चाहते हैं? जब तक मैं जिंदा हूं, वे मुझे अपना रुख बदलने के लिए कभी मजबूर नहीं कर पाएंगे।"
एक दिन पहले भी की थी कार पर हमले की शिकायत
इससे एक दिन पहले भी कुणाल घोष की कार पर हमले की शिकायत सामने आई थी। 26 सितंबर को उत्तरपाड़ा में उनकी कार पर कथित तौर पर पत्थर और अंडे फेंके गए थे। उस समय वह श्रीरामपुर में तृणमूल कांग्रेस की बैठक में शामिल होने जा रहे थे। घटना में कार का पिछला शीशा टूटने की बात सामने आई थी।
उस घटना को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी हुआ था। तृणमूल नेताओं ने हमले के पीछे भाजपा समर्थकों का हाथ होने का आरोप लगाया था, जबकि भाजपा की ओर से इसे स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया बताया गया था।