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बंगाल में चुनावी पारा हाई: दिलीप घोष के 'देख लेने' वाले बयान पर बवाल, चुनाव आयोग पहुंची टीएमसी

Wed, 25 Mar 2026 02:40 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

भाजपा नेता दिलीप घोष पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने बड़ा आरोप लगाया है। दिलीप घोष ने कथित तौर पर खड़गपुर में पुलिस कर्मियों को 'देख लेने' की बात कही थी। इसी के खिलाफ अब तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता दिलीप घोष - फोटो : ANI
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विस्तार
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Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए सियासी रणभेरी बज चुकी है। लेकिन जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, नेताओं की जुबान भी तीखी होती जा रही है। ताजा मामला भाजपा के कद्दावर नेता दिलीप घोष से जुड़ा है। खड़गपुर में एक रैली के दौरान उन्होंने पुलिस कर्मियों को कथित तौर पर 'देख लेने' की धमकी दी। अब इस मामले में तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
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क्या है पूरा मामला?
तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई है। टीएमसी का आरोप है कि दिलीप घोष ने खड़गपुर के जनसभा में चुनावी ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और हिंसक भाषा का इस्तेमाल किया।

शिकायत पत्र के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिलीप घोष खड़गपुर थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज को निशाना बनाते हुए उन्हें चोट पहुंचाने और डराने-धमकाने वाली बातें कह रहे हैं। टीएमसी ने इसे आदर्श चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन बताया है। ममता बनर्जी की पार्टी का कहना है कि यह अपराध है।
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टीएमसी ने क्या कहा?
'दीदी' की पार्टी ने मांग की है कि चुनाव आयोग दिलीप घोष के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करे। इतना ही नहीं, चुनावी रैलियों में इस तरह के भड़काऊ भाषण देने पर पाबंदी लगाने की भी मांग की गई है। टीएमसी का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब घोष ने मर्यादा लांघी है। इससे पहले 16 मार्च को भी पार्टी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

दिलीप घोष का पक्ष
हालांकि, इस पूरे विवाद पर दिलीप घोष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भाजपा का मानना है कि यह केवल चुनावी स्टंट है और टीएमसी हार के डर से उनके नेताओं को निशाना बना रही है।

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टीएमसी ने की रिटर्निंग अधिकारी को हटाने की मांग
वहीं, एक दूसरे मामले में तृणमूल कांग्रेस ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर सुरजीत रॉय को हटाने की मांग की है। पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। पार्टी का आरोप है कि रॉय के भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इस पत्र में दावा किया गया है कि रॉय जब नंदीग्राम-II ब्लॉक में बीडीओ के पद पर तैनात थे, तब से उनके अधिकारी के साथ करीबी रिश्ते हैं। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ  शुभेंदु अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं।

ममता बनर्जी की पार्टी का कहना है कि रॉय जिस पद पर कार्यरत हैं, वह आमतौर पर संयुक्त सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के पास होता है। टीएमसी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि लोकतांत्रिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए रॉय को तुरंत चुनावी ड्यूटी से हटाकर किसी ऐसे अधिकारी को नियुक्त किया जाए, जिसका कोई राजनीतिक झुकाव न हो।
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चुनावी समीकरण
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर इस बार मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है। चुनाव आयोग ने राज्य में दो चरणों में मतदान कराने का फैसला लिया है। पहले चरण में वोटिंग 23 अप्रैल को होगी, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को रखा गया है। पूरे राज्य की किस्मत का फैसला यानी मतगणना 4 मई को होगी। 


 
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