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TMC में नहीं थम रहा टूट का सिलसिला: पूर्व विधायकों ने बागी गुट से की मुलाकात, नेतृत्व पर लगाया अनदेखी का आरोप

Fri, 17 Jul 2026 08:08 PM IST
अमन तिवारी पीटीआई, कोलकाता

सार

तृणमूल कांग्रेस के दो पूर्व विधायकों, तापस चटर्जी और बिस्वजीत दास ने पार्टी के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की है। दोनों नेताओं ने टीएमसी नेतृत्व पर अनदेखी करने और बातचीत का मौका न देने का आरोप लगाया है।
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TMC झंडा - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं। पार्टी में जारी अंदरूनी कलह के बीच शुक्रवार को दो पूर्व विधायकों, तापस चटर्जी और बिस्वजीत दास ने बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि टीएमसी के भीतर अब सामूहिक चर्चा के लिए कोई जगह नहीं बची है। टीएमसी नेताओं का लगातार बागी गुट के संपर्क में जाना पार्टी के लिए एक नया सिरदर्द बन गया है।
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तापस चटर्जी ने बयां किया अपना दर्द
तापस चटर्जी साल 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद माकपा (CPI-M) छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए थे। राजरहाट न्यूटाउन के पूर्व विधायक चटर्जी ने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नेतृत्व के साथ बातचीत करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से किसी भी मुद्दे पर बात करने का मौका नहीं मिला। सरकार में रहने के दौरान टीएमसी प्रमुख ने उनकी अनदेखी की।

चटर्जी ने आगे कहा कि लगभग पांच दशकों का राजनीतिक अनुभव होने के बावजूद, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को किए गए उनके फोन कॉल एक युवा नेता के पास भेज दिए जाते थे। उन्होंने कहा कि उनके साथ किए गए इस खराब व्यवहार से वह बेहद नाखुश थे।
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बिस्वजीत दास की मुलाकात और टीएमसी की प्रतिक्रिया
बागदा के पूर्व विधायक बिस्वजीत दास ने भी विधानसभा स्थित कार्यालय में ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की। दास साल 2019 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने 2021 का विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर जीता था, लेकिन कुछ ही महीनों में वह वापस टीएमसी में लौट आए थे। इससे पहले उन्होंने 2011 और 2016 में टीएमसी के टिकट पर बनगांव उत्तर सीट से जीत हासिल की थी।

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इन मुलाकातों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि शायद वरिष्ठ नेता दबाव नहीं झेल पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लड़ाई के बजाय पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल करके दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है। जो लोग इसका सामना कर सकते हैं वे पार्टी में टिके हुए हैं, और जो नहीं कर पा रहे हैं वे आत्मसमर्पण कर रहे हैं। वहीं इस मामले पर, ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि चटर्जी और दास को अपने गुट में शामिल करने के बारे में सामूहिक नेतृत्व चर्चा करेगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस संबंध में जो भी फैसला होगा, उसकी जानकारी दी जाएगी।
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