पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव से पहले मनरेगा और पीएम आवास योजना की फंडिंग का मामला तूल पकड़ रहा है। अब तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को इन मुद्दों पर खुली बहस की चुनौती दी है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का कहना है कि केंद्र सरकार इस बात के सबूत पेश करे कि पिछले दो वर्षों में मनरेगा और पीएम आवास योजना के लिए फंडिंग नहीं रोकी गई। टीएमसी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले दो वर्षों में आवास परियोजनाओं या मनरेगा के लिए किसी भी तरह का धन आवंटित नहीं किया गया। इसकी वजह से 59 लाख जॉब कार्ड धारक संकट में हैं।
टीएमसी ने दी खुली बहस की चुनौती
उधर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि आवास योजना के तहत पश्चिम बंगाल को फंड दिया गया था। इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सुवेंदु अधिकारी को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार के साथ खुली बहस में शामिल होने की चुनौती दी है। टीएमसी का कहना है कि इस खुली बहस में उनकी पार्टी की तरफ से अभिषेक बनर्जी पूरे तथ्य और आंकड़ों के साथ मौजूद रहेंगे।
टीएमसी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले दो वर्षों में पीएम आवास योजना के दावेदारों और 59 लाख मनरेगा जॉब कार्ड धारकों को एक भी पैसा नहीं दिया गया, इस वजह से वो सभी लोग संकट में हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं को इन तथ्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसलिए भाजपा अपने हिसाब से ऐसी जगह तय करे, जहां खुली बहस हो सके। हम वहां सभी तथ्यों और आंकड़ों को सार्वजनिक करेंगे।
इस मामले में टीएमसी नेता ब्रत्य बसु ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कामों और भाजपा के वादों के बीच काफी अंतर है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने कन्याश्री परियोजना से 87 लाख लड़कियों को लाभ पहुंचाया। इसके अलावा गांवों में 43 लाख घरों का निर्माण कर गरीबों को राहत पहुंचाई।
केंद्र सरकार ने कहा- झूठे हैं आरोप
उधर केंद्र सरकार द्वारा तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह पहले ही कह चुके हैं कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल सरकार को ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए यूपीए सरकार की अपेक्षा ज्यादा राशि आवंटित की गयी है। उन्होंने कहा कि मनरेगा स्कीम के तहत पश्चिम बंगाल को पिछले 9 सालों में 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक दिए गए, जबकि यूपीए के समय यह आंकड़ा 14,900 करोड़ रुपये ही था।