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ईडी की छापेमारी को लेकर टीएमसी का सरकार पर हमला: दिल्ली इमारत हादसे से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप; क्या कहा?

Tue, 08 Sep 2026 02:38 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
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डेरेक ओ ब्रायन - फोटो : पीटीआई
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना बताया। ईडी ने टीएमसी के राज्यसभा सांसद नदीमुल हक से जुड़े ठिकानों पर छापे मारे थे। टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का मकसद दिल्ली में इमारत गिरने की घटना से लोगों का ध्यान हटाना है। इस हादसे में छात्रों की मौत हुई थी।
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दिल्ली दफ्तर में कितनी देर तलाशी चली?
टीएमसी ने कहा कि दिल्ली में उसके पार्टी दफ्तर पर तलाशी करीब दो घंटे में पूरी हो गई थी। यह दफ्तर नदीमुल हक का आधिकारिक आवास भी है। पार्टी के मुताबिक, तलाशी दोपहर करीब एक बजे पूरी हो गई थी। इसके बाद अधिकारी करीब 10 घंटे और वहां रहे। पार्टी का दावा है कि अधिकारी निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे थे। वे रात 10 बजे के बाद वहां से गए।

ईडी क्या लेकर गई?
टीएमसी ने दावा किया कि तलाशी में अधिकारियों को कुछ खास नहीं मिला। पार्टी के अनुसार, अधिकारी एक पुराना फोन और एक पुराना आईपैड लेकर गए। कुछ हार्ड डिस्क भी ले जाई गईं। इनमें मतदाता सूची से जुड़ा आंकड़ा था। टीएमसी ने कहा कि यह जानकारी पहले से सार्वजनिक है।
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ईडी ने कहां-कहां छापे मारे?
अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने सोमवार को कोलकाता, दिल्ली और रांची में सात ठिकानों पर छापे मारे। यह कार्रवाई नदीमुल हक से जुड़े एक उर्दू अखबार के खिलाफ चल रही धनशोधन की जांच के तहत हुई। नदीमुल हक की उम्र 56 साल है। वह अखबार-ए-मशरिक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। यह कंपनी उर्दू अखबार 'अखबार-ए-मशरिक' प्रकाशित करती है। अधिकारियों के अनुसार, ईडी का मामला धनशोधन रोकथाम कानून के तहत दर्ज है। यह मामला विधाननगर पुलिस आयुक्तालय में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है।

डेरेक ओ'ब्रायन ने क्या आरोप लगाया?
डेरेक ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि छापों के जरिये लोगों का ध्यान दिल्ली में इमारत गिरने की घटना से हटाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार दिल्ली में छात्रों की मौत के मुद्दे से ध्यान हटाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से नदीमुल हक के कई ठिकानों और दिल्ली में टीएमसी के दफ्तर पर छापे मारे गए।

छापे के समय हक कहां थे?
टीएमसी नेता ने कहा कि जब ईडी की कार्रवाई चल रही थी, उस समय नदीमुल हक रांची में थे। वह संसद की सरकारी आश्वासन समिति की बैठक में शामिल होने गए थे। ओ'ब्रायन के अनुसार, हक ने बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी के अधिकारी उनके ठिकानों पर छापे मार रहे थे। वहीं, मीडिया में यह खबरें चलवाई जा रही थीं कि हक का पता नहीं चल रहा है।
 
ओ'ब्रायन ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि टीएमसी ईडी की जवाबदेही को जानती है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी बीजेपी सरकार की नीतियों को सामने लाती रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई बदले की भावना से की गई है। उनके मुताबिक, इसका मकसद दिल्ली में इमारत गिरने से जान गंवाने वाले छात्रों के मुद्दे से ध्यान हटाना है।

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दफ्तर की चाबी को लेकर क्या हुआ?
ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि ईडी के अधिकारियों ने पार्टी के कर्मचारियों को फोन पर धमकाया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने कहा था कि अगर दफ्तर की चाबी नहीं दी गई, तो वे ताला तोड़कर अंदर चले जाएंगे। ओ'ब्रायन के अनुसार, उस समय दफ्तर के कर्मचारी निजी काम से बाहर गए हुए थे।
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ओ'ब्रायन ने कहा कि टीएमसी भाजपा और ईडी के दबाव में आकर ऐसा बयान नहीं देगी, जिससे ध्यान भटकाने की कोशिश को बढ़ावा मिले। उन्होंने मीडिया के एक हिस्से पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर कुछ मीडिया संस्थानों के जरिये ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
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