अगर यहां मारे गए लोगों के आंकड़ों की बात करें तो अगस्त माह में ही तीन गांव वालों की मौत हो चुकी है। कई राजनेता तो रेंजर्स से ये भी मांग कर रहे हैं कि वह बाघों को सीधे गोली मार दें। जो कि भारत में गैरकानूनी है। ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है। एक बाघिन (टी1) के लिए दया याचिका वन्य जीव कार्यकर्ता अजय दुबे और सिमारात संधु ने दर्ज कराई है। कई बार तो रेंजर्स को जंगलों के पेड़ों पर बने लड़की से बने स्टैंड पर रहकर बाघों पर नजर रखने को कहा जाता है।
मामले पर वानिकी अधिकारी केएम अभरना का कहना है कि वह उस सुंदर जानवर को नहीं मारना चाहते। लेकिन उन पर राजनेताओं और आम जनता का बहुत दबाव रहता है। इस याचिका में कहा गया है कि टी 1 जैसे ही भारत के 30 फीसदी बाघ भी जिन जंगलों में रहते हैं वहां किसी को घर नहीं बनाना चाहिए। उसके पहले शिकार किसान ही थे जो जंगल की भूमि पर खेती कर रहे थे। अभी तक ये बाघिन अपने ज्यादातर शिकारों का मांस खा चुकी है। यह बाघिन घोड़े और गाय को भी इससे पहले मार चुकी है।
इस बाघिन को पकड़ने की बहुत कोशिशें की गईं लेकिन वह कभी हाथ नहीं आई और झाड़ियों के पीछे छुप जाती है। जिस किसान को बाघिन द्वारा मारा गया था उसकी बेटी का कहना है कि उसे मार देना चाहिए। उसे मारने की बहुत जरूरत है इससे पहले कि वह और लोगों की जान ले। गांव के ही एक अन्य बुजुर्ग का कहना है कि वह बचपन से ही जंगलों में घूमते थे, उस वक्त ऐसा कुछ नहीं था। अब अचानक इन बाघों के हमले बढ़ते जा रहे हैं। पहले यहां बाघ नहीं होते थे, अब पता नहीं चल रहा है कि ये आ कहां से रहे हैं। हालात ये हैं कि गांव वालों की जान पर खतरा बना हुआ है और सुप्रीम कोर्ट में दर्ज याचिका और कानून के कारण बाघों को मार पाने में लोग असमर्थ हैं।