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Dalai Lama: दलाई लामा ने की भारत के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों की सराहना, नेहरू-इंदिरा के साथ बैठकों को याद किया

Sun, 22 Jan 2023 02:41 AM IST
वीरेंद्र शर्मा एएनआई, नई दिल्ली

सार

दलाई लामा ने भारत में अपने प्रवास के बारे में बोलते हुए कहा, देश में रहना अद्भुत है..मैं भारत सरकार का अतिथि हूं..मैं इसकी सराहना करता हूं। 
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बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने शुक्रवार को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान में भारत के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों की सराहना की। आईआईपीए को संबोधित करते हुए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के साथ अपनी बैठकों को याद किया और कहा कि भारत, एक लोकतांत्रिक देश और सभी प्रमुख विश्व परंपराएं एक साथ रहती हैं। धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत अद्भुत है।
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हालांकि महात्मा गांधी से मिलने का अवसर नहीं मिला। लेकिन जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, और लाल बहादुर शास्त्री से मिलने का मौका मिला। भारत में अपने प्रवास के बारे में बोलते हुए कहा, देश में रहना अद्भुत है..मैं भारत सरकार का अतिथि हूं..मैं इसकी सराहना करता हूं। तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि उनकी तिब्बत लौटने की कोई योजना नहीं है क्योंकि वह भारत में पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। उन्होंने पहले कहा था कि वह भारत के सबसे लंबे समय तक मेहमान हैं, जो अपने मेजबान को कभी कोई परेशानी नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि हमारे भाइयों और बहनों हम विशेष रूप से कहते हैं कि चूंकि मैं एक शरणार्थी बन गया और इस देश में रहता हूं, इसलिए मैंने भारतीय विचार और तर्क सीखा है। यह ध्यान रखना उचित है कि चीन अगले दलाई लामा के पुनर्जन्म की बहस में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। तिब्बत राइट्स कलेक्टिव ने बताया कि भविष्य के दलाई लामा के चयन के दौरान चीन वैश्विक बौद्ध समर्थन भी चाहता है।
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दिलचस्प बात यह है कि चीन श्रीलंका के बौद्धों को तक्षशिला और गांधार जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर आकर्षित करने के लिए पाकिस्तान में गांधार बौद्ध धर्म का उपयोग कर रहा है ताकि पाकिस्तान को बौद्ध धर्म के प्रवर्तक देश के रूप में प्रचारित किया जा सके, ताकि केवल अपने उद्देश्य को प्राप्त किया जा सके। चीनी दूतावास ने जारी बयान में कहा कि 14वें दलाई लामा एक साधारण भिक्षु नहीं हैं, बल्कि एक धार्मिक व्यक्ति के रूप में प्रच्छन्न एक राजनीतिक निर्वासन हैं जो लंबे समय से चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों में शामिल हैं और तिब्बत को विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं। 
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