किबिथू, काहो और मेशाई में बैडमिंटन, वॉलीबॉल और बास्केटवॉल कोर्ट बनकर तैयार हैं। शाम को यहां पर भारतीय सेना के मार्गदर्शन में युवा अभ्यास करते हैं। यहां बैडिमंटन खेल रहे आकाश मेयोर कहते हैं, हम लोग यहां तैयारी करते हैं। निश्चित ही एक दिन हमारे गांव से भी खिलाड़ी निकलेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम (वीवीपी) के तहत केंद्र सरकार ने भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले के तीन गांवों काहो, किबिथू और मेशाई का चयन किया था। केंद्र सरकार, अरुणाचल सरकार और भारतीय सेना के प्रयासों से केवल नौ महीनों में ही तीनों गांवों में ऐतिहासिक बदलाव आए हैं। गांवों का पूरी तरह से कायाकल्प हुआ और इनकी तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। स्कूलों के भवन बेहतर हुए हैं। पानी की सुविधा बेहतर हुई है। गांवों में 24 घंटे बिजली आ रही है और साथ ही फोन की घंटियां भी बज रही हैं। संवददाता एन. अर्जुन ने सीमा पर बसे गांवों का दौरा कर वहां के लोगों से जाना क्या बदलाव उनके गांव और जीवन में आए...
बैडमिंटन और वॉलीबॉल कोर्ट
हर घर जल
मोबाइल टावर
वॉलोंग और कीबिथु सर्किल के सभी गांवों में मोबाइल टावर लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। किबिथू और वॉलोंग में तो मोबाइल की घंटियां भी बजने लगी हैं।
2014 के बाद बहने लगी बदलाव की बयार
काहो गांव के कुंचलश्री मेयोर और किबिथू गांव के हेमराज कहते हैं, एक समय था जब हमारे गांवों में सड़कें नहीं थीं, बिजली नहीं थी। 2014 के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और अरुणाचल प्रदेश की पेमा खांडू सरकार ने इस ओर ध्यान दिया। हमारे गांव को वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत चुने गए। इसी का नतीजा है कि आज यहां विकास की बयार बह रही है। आज हमारे गांव में बिजली है, सड़कों का जाल बिछ रहा है, हर घर जल है, रोशनी है और फोन की घंटियां बज रही हैं।
खुले पुस्तकालय और शिक्षकों के लिए आवास
गांव लौटने लगे युवा
गांवों में मधुमक्खी पालन, पर्यटन को बढ़ावा और गांव में ही रोजगार के साधनों को विकसित करने पर जोर देने से गांव से छोड़कर गए युवा यहां पर लौटने लगे हैं। अभी भले ही इसकी संख्या कम हो, लेकिन शुरुआत हो गई है।