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ASI: इन तीन स्थलों को यूनेस्को धरोहर स्थलों की संभावित सूची में किया गया शुमार, मोढेरा का सूर्य मंदिर भी शामिल

Tue, 20 Dec 2022 08:12 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एएसआई ने कहा कि मोढेरा के सूर्य मंदिर और आस-पास के स्मारक, पहाड़ों में काटकर बनाई गई उनाकोटी की मूर्तियां तथा बहुस्तरीय शहर वडनगर यनेस्को की अंतरिम सूची में जोड़े गए तीन नए स्थलों में शामिल हैं। इससे भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बहुत प्रोत्साहन मिलेगा।
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मोढेरा सूर्य मंदिर, गुजरात - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 भारत में तीन नए सांस्कृतिक स्थलों को संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में शामिल किया गया है। इसमें मोढेरा का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर, गुजरात का ऐतिहासिक वडनगर शहर और त्रिपुरा में उनाकोटी की चट्टानों को काटकर बनाई गई मूर्तियां शामिल हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को इस खबर को साझा करते हुए ट्वीट किया और तीनों स्थलों की तस्वीरें भी साझा कीं।

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उन्होंने ट्वीट किया कि बधाई हो भारत! भारत ने यूनेस्को की अस्थायी सूची में तीन और स्थल जोड़े हैं। पहला, गुजरात का वडनगर बहुस्तरीय ऐतिहासिक शहर, दूसरा, मोढेरा का सूर्य मंदिर और इसके आस-पास के स्मारक और तीसरा, उनाकोटी जिले की उनाकोटी श्रृंखला में पत्थरों पर उकेरी गई मूर्तियां।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भी उनके ट्वीट को साझा किया और कहा कि इस कदम से भारत की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा। एएसआई ने कहा कि मोढेरा के सूर्य मंदिर और आस-पास के स्मारक, पहाड़ों में काटकर बनाई गई उनाकोटी की मूर्तियां तथा बहुस्तरीय शहर वडनगर यनेस्को की अंतरिम सूची में जोड़े गए तीन नए स्थलों में शामिल हैं। इससे भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बहुत प्रोत्साहन मिलेगा।
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मोढेरा के सूर्य मंदिर की ये है खासियत

यह सूर्य मंदिर प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में स्थित है, यह बहुत प्राचीन मंदिर हैं, इसका एतिहासिक महत्व भी है। मोढेरा में स्थित सूर्य मंदिर का निर्माण 1026 ई. में सूर्यवंशी सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर ग्याहरवीं शताब्दी का है। इस मंदिर का निर्माण इस तरह से किया गया है कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के समय तक इसपर सूर्य की किरणें पड़ती हैं। यह एक पहाड़ी पर स्थित है।

इस मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर बहुत सुंदर नक्काशी की गई है। इसकी दीवारों पर नक्काशी से पौराणिक कथाओं का चित्रण किया गया है। यह मंदिर तीन हिस्सों में विभाजित है। इस मंदिर में सूर्य कुंड, सभा मंडप और गूढ़ मंडप बना है,  कुंड में जाने के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया गया है।

यह मंदिर विश्वप्रसिद्ध है, इस मंदिर में वास्तुकला का अद्भुत नमूना देखने को मिलता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसको बनाने में चूने का प्रयोग नहीं किया गया है। राजा भीमदेव के द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था जिसमें सभामंडप और गर्भगृह आता है। सभा मंडप के आगे की ओर को एक कुंड बना हुआ है जिस सूर्यकुंड या रामकुंड कहा जाता है। यह एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल भी है। इसकी देख-रेख अब पुरातत्व विभाग के द्वारा की जाती है। 

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