पत्र में कहा गया है कि बिलकिस बानो के सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले के 11 दोषियों को रिहा करने का आदेश देने वाली गुजरात भाजपा सरकार के शर्मनाक फैसले ने उस दिन (जिस दिन आदेश दिया गया) को कलंकित कर दिया है।
गुजरात के तीन कांग्रेस विधायकों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने बिलकिस बानो मामले में गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के 'शर्मनाक फैसले' को वापस लेने के लिए निर्देश देने की मांग की है।
शेख ने शनिवार को कहा, तीन विधायक ज्ञानसुद्दीन शेख, इमरान खेडावाला और जावेद पीरजादा ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है।
शेख ने पत्र की एक प्रतिलिपि को अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा, गुजरात कांग्रेस विधायक ज्ञानसुद्दीन शेख, इमरान खेडावाला और जावेद पीरजादा ने बिलकिस बानो मामले के संबंध में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है।
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विधायकों ने पत्र में क्या कहा?
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कांग्रेस का वर्कशॉप
- फोटो : Social Media
राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा गया है कि बिलकिस बानो के सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले के 11 दोषियों को रिहा करने का आदेश देने वाली गुजरात भाजपा सरकार के शर्मनाक फैसले ने उस दिन (जिस दिन आदेश दिया गया) को कलंकित कर दिया है।
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दोषियों को रिहा कर भाजपा सरकार ने दिखाई संवेदनहीनता
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बिलकिस बानो मामले के दोषियों का रिहाई के बाद फूलमाला पहनाकर स्वागत किया गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
पत्र में आगे कहा गया, केंद्र सरकार का स्पष्ट दिशानिर्देश है कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे बलात्कारियों को क्षमा की नीति के तहत रिहा नहीं किया जाना चाहिए। गुजरात की भाजपा सरकार ने बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में 11 दोषियों को क्षमा करके अपनी संवेदनहीनता दिखाई है। यह न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के लिए निराशाजनक फैसला है।
बलात्कार-हत्या अपराध लिए दी जाए कड़ी से कड़ी सजा
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बिल्किस बानो केस में रिहा हुए दोषी
- फोटो : सोशल मीडिया
इसमे कहा गया है कि बिलकिस बानो मामले के दोषियों को 2002 के गुजरात सांप्रदायिक दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार और उनकी तीन साल की बेटी सहित परिवार के सात सदस्यों की हत्या के अपराध के लिए कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। इसके विपरीत गुजरात की भाजपा सरकार ने इस तरह के जघन्य अपराधों के अपराधियों को माफ कर दिया है।
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विपक्षी दल कर रहे सरकार की तीखी आलोचना
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बिलकिस बानो मामले में जेल से छूटने के बाद दोषी
- फोटो : सोशल मीडिया
सभी 11 दोषियों को 2002 में बिलकिस बानों के सामूहिक बलात्कार और सांप्रदायिक दंगों के दौरान उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 15 अगस्त को गुजरात की भाजपा सरकार द्वारा उन्हें रिहा करने की अनुमति दी गई। क्षमा नीति के तहत उनकी रिहाई की विपक्षी दलों के द्वारा तीखी आलोचना की जा रही है।
3 मार्च 2002 को दाहोद जिले के लिमखेड़ा तालुका के रंधिकपुर गांव में भीड़ ने बिलकिस बानो के परिवार पर हमला किया था। बिलकिस उस समय पांच महीने की गर्भवती थी। उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और उनके परिवार के सात सदस्यों को गोधरा में ट्रेन जलने की घटना से भड़के दंगों के दौरान मौत हो गई थी।