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भाजपा के ये तीन 'फायरब्रांड' प्रवक्ता करेंगे राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ का 'इमेज मेकओवर'

Fri, 13 Jul 2018 02:41 AM IST
हरेन्द्र , अमर उजाला, नई दिल्ली
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इस साल के आखिर में तीन राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर भाजपा पूरी मुस्तैदी के साथ जुट गई है। जहां केन्द्रीय नेतृत्व ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में राजे, शिवराज और रमन को प्रदेशभर में जनयात्राएं निकालने का आदेश दिया है, वहीं मीडिया को मैनेज करने के लिए 'खास प्रबंधक' भी नियुक्त कर दिए हैं, जो राज्य सरकारों की इमेज सुधारने का काम करेंगे।

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भाजपा जहां 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर फिक्रमंद है, वहीं उसके सामने तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की चुनौती भी है। भाजपा भलीभांति जानती है कि अगर वह इन तीनों राज्यों में जीतती है, तो उसकी लोकसभा चुनावों में जीत की राह आसान हो सकती है। विधानसभा चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा ने निचले स्तर पर बूथ प्रबंधकों से लेकर पन्ना प्रमुखों को जुटने का संदेश दे दिया है। 

इसके अलावा पार्टी की सबसे बड़ी कोशिश है कि कैसे मीडिया को 'मैनेज' किया जाए। दरअसल भाजपा को इन तीनों ही राज्यों में एंटी-इंकम्बेंसी का डर सता रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी डर से निबटने के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पॉजिटिव प्रचार के लिए अपने फायरब्रांड तेजतर्रार प्रवक्ताओं को मीडिया प्रबंधन की कमान सौंप दी है। 

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बित पात्रा को राजस्थान की जिम्मेदारी सौंपी है

सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने अपने फायरब्रांड प्रवक्ता संबित पात्रा को राजस्थान, जीवीएल नरसिम्हा राव को मध्य प्रदेश और भाजपा नेशनल मीडिया टीम के उप प्रभारी संजय मयूख को छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है। ये तीनों राज्य की मीडिया सेल को गाइड करने के साथ-साथ मीडिया कैंपेन पर भी नज़र रखेंगे। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर राज्य की स्थानीय मीडिया से भी रूबरू होंगे।  

सूत्रों के मुताबिक राज्यों में पहले से ही भाजपा के प्रवक्ताओं की टीम है, लेकिन मीडिया को मैनेज करने में वे इतने अनुभवी नहीं हैं। वहीं इन आक्रामक शैली वाले राष्ट्रीय प्रवक्ताओं को मीडिया प्रबंधन का खासा अनुभव भी है। केन्द्रीय नेतृत्व ने इन प्रवक्ताओं का चयन राज्य की जरूरतों के मुताबिक किया है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, राज्यों में इनकी सक्रियता बढ़ती जाएगी।

राजस्थान अकेला ऐसा राज्य है, जहां एंटी-इंकम्बेंसी का सबसे ज्यादा खतरा है और राज्य सरकार को लोगों की सबसे ज्यादा नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में वहां सरकार प्रभावशाली तरीके से अपनी इमेज सुधारना चाहती है। सूत्र कहते हैं कि इसके लिए संबित पात्रा से बेहतर चेहरा और कौन हो सकता है। संबित वैसे भी लोगों में काफी लोकप्रिय हैं, और वे जहां भी जाते हैं, वहां सेल्फी खिंचवाने के लिए लोग उनपर टूट पड़ते हैं।
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नरसिम्हा राव को मध्य प्रदेश भेजे जाने के पीछे वजह

वहीं जीवीएल नरसिम्हा राव को मध्य प्रदेश भेजे जाने के पीछे वजह है कि वे न केवल मध्य प्रदेश से अच्छे से परिचित हैं, साथ ही वहां के मीडिया को भी बखूबी समझते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि जीवीएल के प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद चुने जाने से पहले उन्हें मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था। 

इसके अलावा संजय मयूख को छत्तीसगढ़ के लिए चुना जाना कोई आश्चर्यजनक नहीं है। सूत्र बताते हैं कि संजय मयूख बिहार से आते हैं, और वर्तमान में एमएलसी भी हैं। छत्तीसगढ़ में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों की बड़ी आबादी है। साथ ही, उन्हें जातीय समीकरणों की बेहतर समझ भी है, वहीं वह भाजपा नेशनल मीडिया टीम के उप प्रभारी भी हैं और मीडिया की 'नब्ज' को अच्छे से समझते हैं। 

पार्टी की कोशिश है कि ये तीनों ही मीडिया प्रबंधक केन्द्र और राज्य सरकारों का पक्ष ठीक से जनता के बीच रखेंगे। वहीं चुनावों के दौरान बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर सरकार और पार्टी की विचारधारा को बेहतर तरीके से मीडिया के सामने रखेंगे। 
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