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तीन बड़े मुद्दे: यूजीसी, यूसीसी और यूपीआई पर सियासी घमासान के आसार, यूपी में दिख सकता है सबसे ज्यादा असर

Tue, 29 Sep 2026 05:13 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल अजीत खरे, अमर उजाला।

सार

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले तीन ‘यू’ बड़े राजनीतिक मुद्दे बनते दिख रहे हैं। यूजीसी के नए नियम, यूसीसी और यूपीआई पर एमडीआर को लेकर बहस तेज हो सकती है। उत्तर प्रदेश में इनका असर दूसरे राज्यों से ज्यादा दिखने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन इन तीनों मुद्दों में ऐसा क्या है, जिससे अलग-अलग वर्गों में हलचल बढ़ सकती है? क्या ये चुनावी राजनीति की दिशा बदलेंगे?
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यूपी चुनाव से पहले क्यों गरमाए यूजीसी, यूसीसी और यूपीआई के मुद्दे? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से मुद्दों की तलाश शुरू कर दी है। इस समय तीन ‘यू’ चर्चा के केंद्र में आते दिख रहे हैं। इनमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए नियम, समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी और यूपीआई से जुड़ा नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर शामिल है। इन तीनों मुद्दों का असर पंजाब, उत्तराखंड और गोवा के मुकाबले उत्तर प्रदेश में ज्यादा दिखाई देने के आसार हैं। यहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अलग-अलग वर्गों के मतदाताओं के रुख को समझने में जुटे हैं।

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यूजीसी के नए नियमों से क्यों बढ़ी सियासी हलचल?
उत्तर प्रदेश के आगरा, मैनपुरी और दूसरे हिस्सों में यूजीसी के नए नियमों को लेकर युवाओं और अलग-अलग सामाजिक वर्गों में आशंकाएं दिखाई दे रही हैं। यूजीसी ने 2026 में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। इसी बीच जेन-जी आंदोलन और आरक्षण को लेकर सवर्ण युवाओं की नाराजगी भी चर्चा में है। इससे भाजपा के साथ सपा और कांग्रेस के सामने भी राजनीतिक चुनौती बन रही है। सपा अपने पीडीए में ‘ए’ का मतलब अगड़ा बताकर सवर्णों को भी साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

यूपीआई पर एमडीआर से किस वर्ग में बढ़ सकती है नाराजगी?
यूपीआई को लेकर भी आने वाले समय में राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। 15 अक्तूबर से चुनिंदा 2,000 रुपये से ज्यादा के व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होना है। यह शुल्क ग्राहकों के बजाय संबंधित व्यापारियों पर लगाया जाना है। छोटे कारोबारियों के लिए भी कुछ छूट का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि ग्राहक पर यह शुल्क नहीं डाला जाएगा। इसके बावजूद दुकानदारों और कारोबारियों के बीच इस बदलाव को लेकर चिंता है। विपक्षी दल इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
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यूसीसी और बाकी मुद्दों का असर कहां दिख सकता है?
तीसरा मुद्दा यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता का है। यूजीसी का मुद्दा जहां शिक्षा और आरक्षण से जुड़े वर्गों में चर्चा पैदा कर सकता है, वहीं यूपीआई का मामला कारोबार और आम लोगों से जुड़ा है। यूसीसी का असर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर अलग तरह से दिखाई दे सकता है। ऐसे में तीनों मुद्दों के जरिए अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश हो सकती है। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जाति, युवा, कारोबारी और सामाजिक मुद्दों का चुनावी माहौल पर असर महत्वपूर्ण हो सकता है।

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