लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने वाले नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल यानी 2.0 की पिच पर 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' का मुद्दा उछाल दिया है।मोदी इस मुद्दे पर मास्टर स्ट्रोक लगाना चाहते हैं।
'एक राष्ट्र-एक चुनाव' की पिच पर कोई बाधा न आए, इसके लिए पीएम मोदी ने बुधवार को सभी दलों के प्रमुखों की बैठक बुलाई है।कांग्रेस का रुख बता रहा है कि वह 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' के मामले में मोदी को इतनी आसानी से मास्टर स्ट्रोक नहीं लगाने देगी।
इस मुद्दे पर कांग्रेस इंदिरा गांधी की राह पकड़ेगी।1952, 1957, 1962, 1967 में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए गए थे।इंदिरा गांधी ने 1971 में लोकसभा का मध्यावधि चुनाव करा दिया।इसके बाद 1980, 1984, 1991, 1998, 1999 में भी लोकसभा को तय समय से पहले ही भंग कर दिया गया।
मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल में ही 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' का एजेंडा तैयार कर लिया था...
भले ही पीएम मोदी ने 19 जून को 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को आमंत्रित किया है, लेकिन वे अपना एजेंडा तैयार कर चुके हैं।लॉ कमीशन की रिपोर्ट पिछले साल आ गई थी।
उसमें भी इस एजेंडे को गलत नहीं कहा गया है।आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उन सब बातों का जिक्र किया है, जिससे मोदी सरकार के इस एजेंडे को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।कितनी नई ईवीएम और पेपर ट्रेल मशीनों की जरुरत होगी, मतदान केन्द्रों की संख्या, सुरक्षा बल एवं अन्य स्टाफ, इन सब बातों पर गौर कर लिया गया था।
चुनाव आयोग का कहना था कि यदि एक साथ चुनाव कराये जाते हैं तो 12.9 लाख मतपत्र इकाइयों, 9.4 लाख नियंत्रण इकाइयों और लगभग 12.3 लाख वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) का इंतजाम करना होगा। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), जिसमें एक नियंत्रण इकाई (सीयू), एक मतपत्र इकाई (बीयू) और एक वीवीपैट होगा, इसकी कुल लागत 33,200 रुपये बताई गई थी।
ईवीएम की खरीद पर लगभग 4,555 करोड़ रुपये खर्च होंगे।विधि आयोग के मुताबिक, एक ईवीएम मशीन 15 साल तक काम कर सकती है।इस आधार पर यदि 2024 में भी एक साथ चुनाव होते हैं तो 1751.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
अगर 2029 में भी एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो उसके लिए ईवीएम मशीनों की खरीद पर 2017.93 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना होगा।2034 में 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' व्यवस्था लागू रहती है तो ईवीएम खरीद के लिए 13,981.58 करोड़ रुपये जुटाने होंगे।