छत्तीसगढ़ की सेंट्रल जेल से निलंबित की गई डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे ने कहा कि मेरी बस इतनी गलती है कि मैं आदिवासियों की हक की बात करती हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते हमारी जिम्मेदारी केवल जनता की सेवा करना ही नहीं अपने संवैधानिक अधिकारों के रक्षा करना भी है।
अंग्रेजी अखबार इंडिया एक्सप्रेस को दिये इंटरव्यू में डोंगरे ने कहा कि हमे संविधान द्वारा दिये गये मूल अधिकरों की रक्षा करनी चाहिए। बीते दिनों फेसबुक पर डोंगरे ने बस्तर में सरकार की नीतियों की आलोचना की और इस बात दावा किया कि उनके पास एक आदिवासी लड़की को थर्ड डिग्री यातना दिये जाने के भी सबूत है।
सुकमा हमले के बाद डोंगरे ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये सरकार की आलोचना की थी जिकसके कारण उन्हें निलंबित किया जा चुका है। अखबार को ई-मेल के जरिये दिये अपने इंटरव्यू में डोंगरे ने बताया कि उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट पर जो भी पोस्ट किया था वह सब उनकी जानकारी में था।