उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पर्यावरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन-2025 के समापन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी को बड़ी पर्यावरणीय लापरवाही बताया और कहा- हमें पीढ़ीगत स्थिरता के लिए पर्यावरण संरक्षण और विवेकपूर्ण संसाधन प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को भोपाल गैस त्रासदी को बहुत बड़ी पर्यावरणीय लापरवाही बताया और कहा कि अगर उस समय आज जैसा नियामक तंत्र (रेगुलेटरी सिस्टम) होता, तो हालात बहुत अलग होते। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित देशों को पर्यावरण के मुद्दों पर राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों को ऐसे मॉडल अपनाने चाहिए, जहां पर्यावरण का स्वास्थ्य मानव समृद्धि और कल्याण की नींव बने।
'भोपाल गैस त्रासदी से हमने अब तक सबक नहीं सीखा'
उन्होंने कहा, 'भोपाल गैस त्रासदी से हमने अब तक सबक नहीं सीखा है। उस समय लोगों में जागरूकता की बहुत कमी थी। तब हमारे पास एनजीटी जैसा कोई संस्थान नहीं था और न ही कोई ठोस नियामक तंत्र था, जो ऐसी घटनाओं को रोक सकता। अगर ऐसा तंत्र तब होता, तो स्थिति बहुत अलग होती।'
पृथ्वी केवल हमारे लिए नहीं है- उपराष्ट्रपति
जगदीप धनखड़ ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि पृथ्वी केवल हमारे लिए नहीं है। हम इसके मालिक नहीं हैं। पेड़-पौधों और जानवरों को भी फलने-फूलने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इंसान को प्रकृति और सभी जीवों के साथ सामंजस्य बिठाकर जीना सीखना होगा। उपराष्ट्रपति ने सभी देशों से पर्यावरण संरक्षण को नैतिक जिम्मेदारी मानने की अपील की और कहा कि धरती की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।