केंद्र सरकार ने अपने उन कर्मियों को वेतन वृद्धि निर्धारण का एक विकल्प दिया है, जो केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस) के तहत आते हैं। सीएसएस के मूल नियम 22 (1) (a) (1) के अंतर्गत आने वाले कर्मियों को वेतन निर्धारण का विकल्प देना होता है। यह विकल्प उन कर्मियों को नहीं मिलता, जो प्रतिनियुक्ति या एडहॉक प्रमोशन पर होते हैं।
विभाग के स्थायी कर्मियों को यह विकल्प दिया जाता है। केंद्र सरकार ने कहा है कि अब यह विकल्प एडहॉक प्रमोशन वालों को भी मिलेगा। हालांकि वेतन निर्धारण का यह विकल्प केवल एक ही बार दिया जाएगा। इसकी वजह ये है कि लंबे समय से सीएसएस में नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं।
बता दें कि इस तरह की छूट दिए जाने से पहले संबंधित कर्मी को यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि इस बीच उसे रेग्यूलर प्रमोशन नहीं मिलता है, तो वह एडहॉक के दौरान लिए गए फायदे वापस कर देगा। कई बार अनेक कर्मियों का नाम प्रमोशन के लिए भेजा जाता है, मगर सभी को पदोन्नति नहीं मिलती।
इसके अलग अलग कारण हो सकते हैं। जैसे किसी कर्मी की विभागीय जांच पहले से लंबित हो और पदोन्नति के समय उसका नतीजा आ गया हो। यदि उस कर्मी के खिलाफ आरोप साबित होते हैं तो उसका प्रमोशन रोक दिया जाता है। ऐसी स्थिति में उसे वह पैसा वापस करना होगा, जो उसने एडहॉक प्रमोशन की वजह से अर्जित किया है।
इसमें एक नया प्वाइंट जोड़ा गया है, वह यह है कि यह पैसा उन लोगों को वापस नहीं करना पड़ेगा, जो स्थायी पदोन्नति से पहले ही रिटायर हो गए हों। यानी एडहॉक प्रमोशन वाले पद पर काम करते हुए कर्मचारी ने जितना अधिक वेतन लाभ लिया है, वह उसे वापस नहीं करना होगा, बशर्ते वह रिटायर हो गया हो। इसे यूं समझा जा सकता है कि एडहॉक प्रमोशन वाले कर्मी का नाम रेग्यूलर प्रमोशन के लिए भेजा गया है। जब तक आदेश आते, वह सेवानिवृत हो जाता है। ऐसी स्थिति में संबंधित कर्मी से रिक्वरी नहीं होगी।
केंद्र सरकार के आदेशों में यह भी कहा गया है कि ये छूट उन्हें मिलेगी, जो कर्मी पिछले एक साल से सेवा में नियमित रहे हों। एडहॉक प्रमोशन वाले पद पर काम करने वाले कर्मियों का कोई सर्विस ब्रेक नहीं होना चाहिए। यहां बता दें कि ऐसे कर्मचारी को एक साल की शर्त पूरी करने के अलावा अपनी इच्छा भी बतानी होगी। उसे लिखकर देना होगा कि वह वेतन निर्धारण का विकल्प लेने का इच्छुक है।