वरिष्ठ पत्रकार शकील अख्तर, आजतक की मौसमी सिंह समेत अन्य ने जमंत-मंतर पर प्रदर्शन किया। पत्रकारों का यह प्रदर्शन कार्यस्थल महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के विरोध में आवाज बुलंद करना था। इस दौरान पत्रकारों ने भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष के बयान से भी नाराजगी जताई। महिला पत्रकारों ने कहा कि उन्हें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न मंजूर नहीं है और सरकार इसको लेकर लगातार असंवेदनशील बनी हुई है।
प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने कहा कि दस महिला पत्रकार विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर की हरकतों की शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार के कान में जूं नहीं रेंग रही है। केंद्र सरकार अभी भी पूरे मामले में पर्दा डालने में लगी है। वहीं भाजपा उल्टे शिकायत करने वाली महिलाओं के मामले की सत्यता जांचने का हवाला दे रही है। जबकि केंद्र सरकार और भाजपा दोनों लगातार बेटी पढ़ाओं, बेटी बचाओ, महिलाओं के सम्मान आदि की बात करती रही है।
इस दौरान महिला पत्रकारों ने मांग की है कि सरकार को विदेश मंत्री एमजे अकबर का इस्तीफा लेने के बाद इस प्रकरण की जांच करनी चाहिए। इसे महिलाओं के विरुद्ध अपराध के नये कानून के तहत देखा जाना चाहिए और पुलिस अथवा जांच एजेंसी इस मामले की निष्पक्ष जांच करें। देश के सभी मीडिया संस्थानों, मनोरंजन से जुड़ी एजेंसियों तथा सरकारी विभागों आदि में एक कमेटी बने। यह कमेटी महिलाओं की शिकायत सुने और कार्यस्थल पर होने वाले उत्पीड़न के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।