सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्यों को अपने यहां आने वाले सामानों पर एंट्री टैक्स लगाने का पूरा अधिकार है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को अपने फैसले में राज्यों के उस कानून को संवैधानिक मान्यता दे दी, जिसमें उनके यहां आने वाली वस्तुओं पर एंट्री टैक्स लगाने का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने दो के मुकाबले सात मतों से यह फैसला दिया कि राज्य के टैक्स संबंधी कानूनों को राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत नहीं है। संविधान की धारा 304बी के तहत ऐसा करना जरूरी नहीं है।
चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, राज्यों के एक दूसरे के यहां से आने वाली वस्तुओं पर टैक्स लगाने का अधिकार है। वस्तुओं के बीच भेद नहीं हो सकता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर एक राज्य अपने ही यहां बने उत्पादों पर एंट्री टैक्स लगाता है तो वह दूसरे राज्यों से आने वाले ऐसे ही समान उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाने का अधिकारी नहीं हो सकता। बेंच का बहुमत ‘स्थानीय इलाके’ शब्द का निर्धारण छोटी नियमित बेंच के सुपुर्द करने के पक्ष में था।
एंट्री टैक्स लगाने के पक्ष में जस्टिस टी एस ठाकुर के साथ जस्टिस ए के सीकरी, एस ए बोबडे, जस्टिस एसके सिंह, एन वी रमन्ना, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस ए एम खानविलकर शामिल थे। जबकि जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण का फैसला अलग था। एंट्री टैक्स के मामले में नौ जजों की बेंच ने सुनवाई इस साल 19 जुलाई से शुरू की थी। उसने केंद्र की संसद में जीसटी बिल पारित होने तक इंतजार करने की दलील को मानने से इनकार कर दिया था। 20 सितंबर को बेंच ने इस मामले पर फैसला रोक लिया था।