मणिपुर की विशेष अदालत ने आरोपी पांचों ग्राम रक्षा स्वयंसेवक को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा, पूर्व अनुमति के पांचों आरोपी मणिपुर से बाहर नहीं जा सकते हैं। पुलिस ने आंदोलन के दौरान उन पर हथियार रखने का आरोप लगाया था।
मणिपुर की विशेष अदालत की ओर से पांच रक्षा स्वयंसेवकों को जमानत पर रिहा किए जाने के कुछ देर बाद उनमें से एक युवक की फिर से गिरफ्तारी पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई।
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एक अधिकारी ने बताया कि अदालत की ओर से रिहा किए जाने के कुछ समय बाद ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी ने एक युवक को फिर गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि हालांकि दोबारा गिरफ्तार किए गए युवक की स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए चार युवाओं को जमानत मिलने के बाद उनके परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया, जबकि प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पूर्व कैडर मोइरांगथेम आनंद को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है।
इससे पहले, उन लोगों को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया गया था। अदालत ने उनकी जमानत पर रिहाई के लिए मुचकले के अलावा कई शर्तें भी लगाईं। अपने आदेश में, अदालत ने कहा कि पांचों आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा, खुद को जांच अधिकारियों के सामने उपलब्ध कराना होगा और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित नहीं करना होगा।
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अदालत ने युवाओं को पूर्वानुमति के बिना मणिपुर राज्य नहीं छोड़ने का भी निर्देश दिया। न्यायिक हिरासत के लिए मणिपुर पुलिस की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, गिरफ्तारी के समय तक सभी आरोपी व्यक्तियों ने राज्य के खिलाफ कोई भी पूर्वाग्रहपूर्ण गतिविधि नहीं की है। कर्फ्यू प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए सैकड़ों महिलाएं इंफाल पश्चिम जिले में चीराप अदालत परिसर के सामने बैठ गईं, जहां पांच युवकों की रिहाई की मांग को लेकर सुनवाई हो रही थी। राज्य में बृहस्पतिवार को सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच व्यापक झड़पें देखी गईं, जब प्रदर्शनकारियों ने पांच युवकों को रिहा कराने के लिए पुलिस स्टेशनों पर धावा बोलने का प्रयास किया।