जजों के नाम पर कथित रिश्वतखोरी मामले को लेकर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में हुए विवाद का शुक्रवार को अंत हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की छानबीन विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग वाली कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटबिलिटी एंड रिफॉर्म (सीजेएआर) की याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस आरके अग्रवाल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने न केवल सीजेएआर की याचिका खारिज की, बल्कि संगठन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मालूम हो कि इसी पीठ ने 14 नवंबर को वकील कामिनी जायसवाल की इसी तरह की याचिका को खारिज कर दिया था। उस याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने एक ही तरह की दो याचिकाएं दायर करने पर कड़ा एतराज जताया था।
साथ ही पीठ ने वकील कामिनी जायसवाल और सीजेएआर के वकील और प्रंशात भूषण के प्रयासों को फोरम शॉपिंग करार दिया था। पीठ ने इसे न्यायालय की अवमानना बताया, लेकिन उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया था।
पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि इस मामले में सीबीआई द्वारा दायर एफआईआर में न तो सुप्रीम कोर्ट के किसी जज का नाम है और न ही सुप्रीम कोर्ट के किसी जज के खिलाफ एफआईआर दायर की जा सकती है।
पीठ ने कहा कि एफआईआर में दर्ज रिश्वतखोरी से सुप्रीम कोर्ट के किसी जज का कोई संबंध नहीं है, क्योंकि वह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित ही नहीं है। पीठ ने यहां तक कहा था कि इस तरह की याचिका से न्यायपालिका की गरिमा व प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और लोग बेवजह न्यायपालिका की सत्यनिष्ठा को संदेह की नजर से देख रहे हैं।