वैज्ञानिकों की मानें तो, यह ला-नीना के बेअसर होने का नतीजा है। स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया के अधिक तीव्र और मजबूत होने का संकेत है। यह अनुमान देश के बड़े हिस्से में गर्मी की मौजूदा प्रवृत्ति के आकलन के आधार पर निकाला गया है।
इस साल गर्मी लोगों को ज्यादा परेशान कर सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सामान्य से अधिक तापमान के साथ अधिक समय तक गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। इस बार सर्दियों में तपिश के अहसास और बसंत में ठंडी हवाएं न चलने से यह अनुमान सही साबित हो रहा है।
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वैज्ञानिकों की चेतावनी
वैज्ञानिकों की मानें तो, यह ला-नीना के बेअसर होने का नतीजा है। स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया के अधिक तीव्र और मजबूत होने का संकेत है। यह अनुमान देश के बड़े हिस्से में गर्मी की मौजूदा प्रवृत्ति के आकलन के आधार पर निकाला गया है। आंकड़े बताते हैं कि देश में इस बार फरवरी महीना 1901 के बाद सबसे गर्म रहा, और 2001 के बाद से यह पांचवां ऐसा वर्ष था, जब सबसे कम बारिश हुई।
प्रोफेसर अर्पिता ने दी जानकारी
आईआईटी बॉम्बे में सेंटर फॉर क्लाइमेट स्टडीज की एसोसिएट प्रोफेसर अर्पिता मंडल ने कहा, इस साल सर्दी असामान्य रूप से शुष्क थी, जिसमें बारिश सामान्य से कम हुई। बारिश शीतलन की प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो तापमान कम करने में मदद करती है। आईआईटी बॉम्बे में पृथ्वी विज्ञानी प्रो. रघु मुर्तुगुडे दिसंबर-फरवरी के दौरान गर्म व ठंडे तापमान में विसंगतियों को जेट धाराओं में बदलाव का नतीजा मानते हैं, जो वायुमंडल के ऊपरी स्तरों में बहने वाली तेज हवाएं होती हैं।
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ला-नीना सक्रिय होने पर घटता है तापमान
आईआईटी गांधीनगर में सिविल इंजीनियरिंग के चेयर प्रोफेसर विमल मिश्रा कहते हैं, मौसम चक्र में बदलाव ला-नीना की सक्रियता में कमी का नतीजा है। अल-नीनो से सर्दियों के तुरंत बाद बढ़ा तापमान देखेंगे, जबकि ला-नीना से अधिक संख्या में सर्द दिन होते हैं। ईएनएसओ यानी अल-नीनो दक्षिणी दोलन पूरी दुनिया में मौसम पर असर डालता है। जहां 14 वर्ष में सबसे गर्म रही 2024 की गर्मी 2023-24 की अल-नीनो परिस्थितियों का नतीजा थी।